Red Sea Tension : यमन के हूती विद्रोहियों और सोमालिया में सक्रिय आतंकी संगठन अल-शबाब के बीच कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क सामने आने से लाल सागर और अदन की खाड़ी की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यमन से मिलिट्री ग्रेड के हथियार सोमालिया तक पहुंचाए जा रहे हैं। इस नेटवर्क में दोनों संगठनों से जुड़े लोगों के बीच संपर्क की बात भी सामने आई है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में जिब्रिल ‘वन-आर्म्ड’ याह्या अली नाम के एक सोमाली नागरिक की भूमिका सामने आई है।
बताया गया है कि वह यमन से हथियार खरीदकर उन्हें सोमालिया में अल-शबाब तक पहुंचाता था। रिपोर्ट के अनुसार, जिब्रिल ने यमन के अल-गायदा इलाके में मौजूद एक हथियार कारोबारी की मदद से हूती नेटवर्क से सैन्य स्तर के हथियार हासिल किए।
Red Sea Tension
अल-शबाब सोमालिया में सक्रिय इस्लामिक विद्रोही संगठन है, जिसके संबंध अलकायदा से बताए जाते हैं। संगठन के पास आर्थिक संसाधन और स्थानीय नेटवर्क मौजूद हैं, लेकिन अपनी गतिविधियों के लिए उसे हथियार, प्रशिक्षण और सैन्य तकनीक की जरूरत रहती है। दूसरी तरफ हूतियों के पास मिसाइल, ड्रोन और दूसरे आधुनिक सैन्य संसाधनों तक पहुंच है। ऐसे में दोनों पक्षों की जरूरतें सीमित सहयोग का आधार बन सकती हैं।
दोनों के बीच संपर्क
संभावित हथियार सौदे में दोनों संगठनों को अलग-अलग फायदे मिल सकते हैं। अल-शबाब को बेहतर हथियार और सैन्य क्षमता बढ़ाने का अवसर मिल सकता है, जबकि हूती नेटवर्क को आर्थिक लाभ के साथ अफ्रीकी क्षेत्र में नया संपर्क तंत्र हासिल हो सकता है। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे दोनों संगठनों के बीच औपचारिक गठबंधन कहना जल्दबाजी होगी। यमन और सोमालिया के बीच स्थित समुद्री क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
लाल सागर और अदन की खाड़ी से बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। ऐसे में अगर हूती नेटवर्क की सोमालिया में मौजूदगी बढ़ती है या अल-शबाब तक आधुनिक हथियारों की पहुंच मजबूत होती है, तो समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
पुराने मतभेद
हूती संगठन और अलकायदा से जुड़े गुटों के बीच विचारधारा और क्षेत्रीय हितों को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। दोनों के बीच कई मौकों पर संघर्ष भी सामने आया है। इसलिए हथियारों की संभावित सप्लाई को सीधे तौर पर स्थायी गठबंधन का संकेत मानना सही नहीं होगा। इसके बावजूद साझा हितों के लिए पर्दे के पीछे सीमित सहयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि यह संपर्क सिर्फ हथियारों की सीमित सप्लाई तक रहता है या आने वाले समय में इसका दायरा बढ़ता है।
अगर हूती नेटवर्क और अल-शबाब के बीच सैन्य संसाधनों का आदान-प्रदान मजबूत होता है, तो इसका असर केवल यमन और सोमालिया तक सीमित नहीं रह सकता। लाल सागर, अदन की खाड़ी और आसपास के समुद्री इलाकों में पश्चिमी देशों के हितों तथा व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
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