HSBC : दुनिया के बड़े ब्रोकरेज हाउस HSBC ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर अपना नजरिया बदल दिया है। ब्रोकरेज ने भारत की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ से घटाकर ‘अंडरवेट’ कर दी है। खास बात यह है कि एक महीने के अंदर दूसरी बार HSBC ने भारत को लेकर अपना रुख बदला है, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई है। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के अंत से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
HSBC ने घटाई रेटिंग
तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। ऐसे में आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है और आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर तेल महंगा बना रहता है, तो देश की ग्रोथ पर असर पड़ना तय है और कंपनियों की लागत भी बढ़ेगी। इस साल भारतीय बाजार का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा है। Nifty 50 में अब तक करीब 6.7 फीसदी और BSE Sensex में 7.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे भारत दुनिया के कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल हो गया है।
कमाई के अनुमान पर खतरा
HSBC की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 के लिए कंपनियों की कमाई में 16 फीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाया गया था, लेकिन मौजूदा हालात में इसमें कटौती हो सकती है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी और बढ़ोतरी होती है, तो कंपनियों की कमाई की ग्रोथ करीब 1.5 फीसदी तक घट सकती है। बाजार के लिए एक और बड़ी चिंता विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना है। 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय बाजार से करीब 18.5 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। इससे पहले 2025 में भी उन्होंने करीब 18.9 अरब डॉलर की बिकवाली की थी। इससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
देखें लिस्ट
| बाज़ार (Market) | वेटेज (Weighting) |
|---|---|
| मेनलैंड चाइना | ओवरवेट |
| हांगकांग | ओवरवेट |
| सिंगापुर | ओवरवेट |
| कोरिया | अंडरवेट से न्यूट्रल |
| जापान | न्यूट्रल |
| मलेशिया | न्यूट्रल |
| फिलीपींस | न्यूट्रल |
| ताइवान | न्यूट्रल |
| इंडोनेशिया | अंडरवेट |
| भारत | न्यूट्रल से अंडरवेट |
| थाईलैंड | अंडरवेट |
रुपये और आईटी सेक्टर पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है। इसके अलावा आईटी सेक्टर पर भी दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते असर से सॉफ्टवेयर कंपनियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है। घरेलू निवेशक SIP के जरिए लगातार बाजार में पैसा डाल रहे हैं, जिससे कुछ सहारा मिल रहा है। HSBC का मानना है कि प्राइवेट बैंकिंग, बेस मेटल और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर में अभी भी निवेश के मौके बने हुए हैं। लेकिन कुल मिलाकर फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के लिए रास्ता थोड़ा मुश्किल नजर आ रहा है।
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