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Kanpur जू में 12 साल बाद गूंजी किलकारियां, घड़ियाल के 15 बच्चों का हुआ जन्म

Kanpur Zoo News : कानपुर चिड़ियाघर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। करीब 12 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यहां पहली बार घड़ियालों की सफल ब्रीडिंग हुई है। जू में मौजूद घड़ियाल के जोड़े से 15 बच्चों का जन्म हुआ है, जिससे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है। पहले जहां चिड़ियाघर में केवल एक नर और एक मादा घड़ियाल मौजूद थे, वहीं अब नवजात बच्चों के आने से इनकी संख्या बढ़ गई है। जू प्रशासन के अनुसार घड़ियालों का यह जोड़ा वर्षों पहले रेस्क्यू कर यहां लाया गया था।

नर घड़ियाल को वर्ष 2017 में लाया गया था, जबकि मादाएं पहले से चिड़ियाघर में थीं। लंबे समय तक अनुकूल माहौल नहीं मिलने के कारण प्रजनन संभव नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार प्रशासन की विशेष तैयारी रंग लाई और अंडों से स्वस्थ बच्चों का जन्म हुआ।

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मार्च के दौरान जू में मौजूद घड़ियालों के बीच संघर्ष की घटना हुई थी, जिसमें एक मादा गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उपचार के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर में अंडे मिलने के बाद विशेषज्ञों ने घड़ियालों के संरक्षण और प्रजनन को लेकर नई योजना बनाई। इसके तहत नर और बची हुई मादा के लिए प्राकृतिक वातावरण तैयार किया गया। घड़ियालों के प्राकृतिक व्यवहार को ध्यान में रखते हुए बाड़े में विशेष रूप से बालू डलवाई गई। मादा ने इसी रेत में गहराई बनाकर अंडों को सुरक्षित रखा। लगभग दो महीने तक अंडों की प्राकृतिक देखभाल होती रही। निर्धारित समय पूरा होने पर अंडों से 15 नन्हे घड़ियाल बाहर निकल आए, जिससे जू प्रशासन और वन्यजीव विशेषज्ञों में खुशी की लहर दौड़ गई।

तापमान तय करेगा बच्चों का जेंडर

विशेषज्ञों के अनुसार घड़ियालों में नर और मादा का निर्धारण जन्म से पहले नहीं, बल्कि अंडों के आसपास के तापमान से होता है। अधिक तापमान पर मादा और कम तापमान पर नर घड़ियाल विकसित होते हैं। यही वजह है कि अंडों के आसपास के वातावरण पर विशेष नजर रखी जाती है। नवजात घड़ियाल जन्म के तुरंत बाद भोजन नहीं करते। उनके शरीर में अंडे की जर्दी से प्राप्त पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, जो शुरुआती दिनों में ऊर्जा का स्रोत बनते हैं। सात दिन पूरे होने के बाद उन्हें छोटी मछलियां, चिकन का बारीक मिश्रण, कैल्शियम और विटामिन सप्लीमेंट दिए जाएंगे ताकि उनका शारीरिक विकास बेहतर हो सके।

ग्रीन नेट और विशेष निगरानी

नन्हे घड़ियालों को चील, कौवे और अन्य शिकारी पक्षियों से बचाने के लिए पूरे बाड़े को ग्रीन नेट से ढक दिया गया है। इसके अलावा उनकी देखरेख के लिए दो पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए तालाब के पानी को भी नियमित रूप से बदला जा रहा है। जू प्रशासन का मानना है कि यह सफलता केवल चिड़ियाघर के लिए नहीं, बल्कि घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। आमतौर पर नवजात घड़ियालों के शुरुआती जीवन में कई तरह की चुनौतियां रहती हैं, लेकिन विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अधिकांश बच्चों को सुरक्षित बड़ा किया जा सकेगा। यह उपलब्धि भविष्य में घड़ियाल संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों के लिए एक सफल मॉडल साबित हो सकती है।

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