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UP Congress में बड़ा बदलाव, राजेंद्र पाल गौतम बने प्रभारी; प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चा तेज

UP Congress : कांग्रेस ने शुक्रवार शाम उत्तर प्रदेश संगठन में अहम फेरबदल करते हुए अविनाश पांडेय को प्रदेश प्रभारी के पद से हटा दिया। पार्टी नेतृत्व ने उनकी जगह राजेंद्र पाल गौतम को नई जिम्मेदारी सौंपी है। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब कांग्रेस 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति बना रही है।

राजेंद्र पाल गौतम दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने सितंबर 2024 में आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें अनुसूचित जाति विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई और अब उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।

UP Congress

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस जल्द ही उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष के पद पर भी बदलाव कर सकती है। मौजूदा अध्यक्ष अजय राय को अगस्त 2023 में यह जिम्मेदारी मिली थी और उनका कार्यकाल अब तीन वर्ष पूरा होने की ओर है। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी किसी ओबीसी या मुस्लिम चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर नए सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी में है।

इमरान मसूद और राकेश राठौर की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस सांसदों ने दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर प्रदेश अध्यक्ष बदलने का सुझाव दिया था। इस दौरान सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद और सीतापुर से सांसद राकेश राठौर के नाम प्रमुखता से सामने आए। इमरान मसूद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली मुस्लिम नेता के रूप में देखा जाता है, जबकि राकेश राठौर ओबीसी समाज से आने वाले वरिष्ठ नेता हैं। पार्टी मानती है कि इन दोनों में से किसी एक को जिम्मेदारी देने से जातीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत किया जा सकता है।

सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस

कांग्रेस की नई रणनीति का केंद्र सामाजिक संतुलन माना जा रहा है। अभी तक प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी दोनों ही सवर्ण समाज से थे। ऐसे में पार्टी नेतृत्व का मानना है कि दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग को संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व देकर 2027 के चुनाव में नई राजनीतिक जमीन तैयार की जा सकती है। राहुल गांधी लगातार जातिगत जनगणना और सामाजिक भागीदारी का मुद्दा उठा रहे हैं, इसलिए संगठनात्मक बदलाव को भी उसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

नजर में कैसे आए राजेंद्र पाल गौतम

राजेंद्र पाल गौतम का कद कांग्रेस में तेजी से बढ़ा है। मार्च में कांशीराम जयंती को कांग्रेस ने ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ के रूप में मनाया था। लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम की तैयारियों और आयोजन में उनकी अहम भूमिका रही थी। कार्यक्रम में राहुल गांधी भी शामिल हुए थे और उन्होंने मंच से राजेंद्र पाल गौतम के काम की खुलकर सराहना की थी। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उसी कार्यक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा और मजबूत हुआ।

जब मायावती से नहीं हो सकी मुलाकात

राजेंद्र पाल गौतम उस समय भी चर्चा में आए थे, जब 19 मई को वह बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया के साथ बिना पूर्व निर्धारित समय के बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके लखनऊ स्थित आवास पहुंचे थे। दोनों नेताओं ने सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से मुलाकात का संदेश भेजा और करीब दस मिनट तक बाहर इंतजार किया, लेकिन व्यस्तता का हवाला देते हुए मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों नेता अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कराकर लौट गए। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थीं।

कांग्रेस को देनी पड़ी थी सफाई

मायावती से मुलाकात नहीं होने के बाद इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगने लगी थीं। चर्चा थी कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के साथ संभावित राजनीतिक विकल्प तलाश रही है। हालांकि अगले ही दिन प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे नेताओं का व्यक्तिगत कार्यक्रम बताते हुए कहा कि पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक निर्देश नहीं था। वहीं राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि वह केवल मायावती का हालचाल जानने गए थे, जबकि सांसद तनुज पुनिया ने भी इसे सामान्य शिष्टाचार मुलाकात बताया था।

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