Agra News : आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश देने में लापरवाही बरतने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों ने विभागीय नोटिस का भी जवाब नहीं दिया, उनके खिलाफ अब नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश न देने के मामले में पांच निजी विद्यालयों को अलग-अलग तिथियों पर नोटिस जारी किए गए थे।
इनमें दो स्कूलों को 18 जून, एक को 15 जून, एक को 11 जून और एक विद्यालय को 3 जून को नोटिस भेजा गया था। स्कूल प्रबंधन से पूछा गया था कि चयनित बच्चों को निर्धारित समय पर प्रवेश क्यों नहीं दिया गया।
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विभाग के अनुसार, नोटिस जारी होने के बाद भी किसी भी विद्यालय ने न तो अपना पक्ष रखा और न ही यह जानकारी दी कि संबंधित विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया गया है। जवाब न मिलने के कारण अब इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने बताया कि आरटीई अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। विभाग का कहना है कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार से समझौता करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।
25 प्रतिशत सीटें आरक्षित
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित विद्यालयों की जिम्मेदारी होती है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी चयनित बच्चों का नि:शुल्क प्रवेश सुनिश्चित करें। विभाग ने कहा कि इस व्यवस्था का पालन हर हाल में कराया जाएगा।
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