Agra Muharram 2026 : मोहर्रम की दसवीं से पहले आगरा में ऐतिहासिक फूलों के ताजिए की जियारत के लिए गुरुवार देर रात से शुक्रवार तड़के तक अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। टीला पाया चौकी स्थित इमामबाड़े में रातभर गुलपोशी, तबर्रुक और जियारत का सिलसिला चलता रहा। लोगों ने कर्बला के शहीदों की याद में दुआएं मांगीं और अपनी मन्नतें पेश कीं। आज शहरभर से निकलने वाले ताजियों के जुलूस विभिन्न कर्बलाओं में पहुंचकर सुपुर्द-ए-खाक किए जाएंगे। प्रशासन ने पूरे जुलूस मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। ऐतिहासिक फूलों वाले ताजिए पर रात करीब साढ़े 11 बजे गुलाब के फूल चढ़ाए गए।
इसके बाद जियारत के लिए आने वाले जायरीन की संख्या लगातार बढ़ती गई। देर रात मेवा कटरा से निकला पारंपरिक अलम का जुलूस भी इमामबाड़े पहुंचा, जहां ताजिए पर हाजिरी दी गई। जुलूस का नेतृत्व खानकाह कादरिया चिश्तिया नियाजिया, मेवा कटरा के सज्जादानशीन सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह ने किया।
Agra Muharram 2026
रात करीब एक बजे शिया समुदाय के अजादारों ने कर्बला के शहीदों की याद में मातम किया। आयोजन समिति से जुड़े चौधरी सरफराज खान ने बताया कि फूलों का ताजिया उठने के बाद ही शहर के विभिन्न इलाकों में रखे गए अन्य ताजियों के जुलूस रवाना होंगे। परंपरा के अनुसार ऐतिहासिक फूलों के ताजिए को न्यू आगरा कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। आयोजन की व्यवस्थाओं में कई स्वयंसेवकों ने अहम भूमिका निभाई। मेवा कटरा से निकला अलम मुबारक का पारंपरिक जुलूस फव्वारा चौक, हॉस्पिटल रोड, गुड़ की मंडी, फुलट्टी बाजार और तिलक बाजार से होकर पाया चौकी पहुंचा। पूरे मार्ग में नौहाख्वानी के जरिए कर्बला के शहीदों को याद किया गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
आकर्षण का केंद्र
टीला पाया चौकी स्थित इमामबाड़े में अबुल उलाई शेख कमेटी की ओर से मस्जिद-ए-नबी की आकर्षक झांकी भी सजाई गई। गम-ए-मौला इमाम हुसैन की याद में तैयार की गई इस झांकी के दर्शन के लिए दिनभर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धालुओं ने जियारत कर अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। शहर में मोहर्रम के अवसर पर धार्मिक आस्था और परंपराओं का माहौल पूरी तरह देखने को मिला।
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