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Bengal Elections में कांग्रेस अकेली, आईएनडीआईए साथी दूर; तृणमूल के लिए जुटे दूसरे दल

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Bengal Elections : West Bengal विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस बार खुद को काफी अलग-थलग महसूस कर रही है। जो दल कभी उसके साथ खड़े थे, वही अब दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। इससे पार्टी के सामने चुनावी चुनौती और बढ़ गई है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बने INDIA bloc में शामिल कई दल इस बार कांग्रेस के साथ नहीं दिख रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कुछ पार्टियां खुलकर तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में प्रचार कर रही हैं।

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राज्य में कांग्रेस की हालत पहले से ही कमजोर है। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। वहीं 2024 लोकसभा चुनाव में भी उसका प्रदर्शन सीमित रहा। ऐसे में यह चुनाव उसके लिए वापसी की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

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इस बार कांग्रेस ने वाममोर्चा का सहारा नहीं लिया और अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इससे मुकाबला और कठिन हो गया है, क्योंकि पहले वामपंथियों के साथ मिलकर पार्टी कुछ हद तक संतुलन बना लेती थी। Hemant Soren और Kalpana Soren जैसे नेता झारखंड से आकर तृणमूल के लिए प्रचार कर रहे हैं। वहीं Tejashwi Yadav भी ममता बनर्जी के समर्थन में नजर आए हैं, जबकि इन दलों का कांग्रेस के साथ पहले गठबंधन रहा है।

तृणमूल को केजरीवाल का समर्थन

Arvind Kejriwal भी बंगाल में तृणमूल के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे हैं। हालांकि उनकी पार्टी अब आईएनडीआईए का हिस्सा नहीं है, लेकिन उनका रुख कांग्रेस के लिए झटका माना जा रहा है। Akhilesh Yadav अब तक बंगाल चुनाव प्रचार से दूर हैं। हालांकि उनके और Rahul Gandhi के बीच अच्छे संबंध बताए जाते हैं, लेकिन मैदान में उनकी गैरमौजूदगी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है।

केंद्रीय नेतृत्व भी सीमित

कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं की सक्रियता भी कम नजर आई है। Mallikarjun Kharge और राहुल गांधी ने कुछ रैलियां जरूर की हैं, लेकिन भाजपा की तुलना में पार्टी का प्रचार कमजोर दिख रहा है। दूसरी ओर Narendra Modi और Amit Shah समेत कई बड़े नेता लगातार चुनाव प्रचार में जुटे हैं। इससे मुकाबला और भी कड़ा हो गया है।कांग्रेस के लिए यह चुनाव आसान नहीं है। एक तरफ संगठन की कमजोरी और दूसरी तरफ सहयोगियों की दूरी, दोनों मिलकर पार्टी की राह मुश्किल बना रहे हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस चुनौती से कैसे निपटती है।

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