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Allahabad High Court की सख्त टिप्पणी, बालिगों की पसंद पर किसी का हक नहीं; पुलिस को लगाई फटकार

Allahabad High Court
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Allahabad High Court : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी भी बालिग व्यक्ति को यह बताने का अधिकार किसी के पास नहीं है कि उसे किसके साथ रहना है या किससे शादी करनी है। कोर्ट ने साफ किया कि यह हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस JJ Munir और जस्टिस Tarun Saxena की खंडपीठ ने सहारनपुर में दर्ज एक एफआईआर को रद्द करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की।

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कोर्ट ने कहा कि आजकल पुलिस ऐसे मामलों में अनावश्यक दखल दे रही है, जहां उसका कोई अधिकार नहीं बनता। इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे साफ संदेश जाता है कि बालिगों के निजी जीवन में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन को ज्यादा सतर्क रहना होगा।

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मामला एक ऐसे जोड़े से जुड़ा था, जिसने 10 दिसंबर 2025 को देहरादून के एक मंदिर में शादी की थी। लड़की के पिता ने इस शादी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। हालांकि, दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि लड़की बालिग थी और अपनी मर्जी से शादी की थी। अदालत ने कहा कि जब दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं, तो ऐसे में पुलिस द्वारा केस दर्ज करना और जोड़े का पीछा करना पूरी तरह गलत है। कोर्ट के मुताबिक, यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है और संविधान के खिलाफ है।

गुमशुदगी तक सीमित रह सकती थी शिकायत

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में लड़की के पिता सिर्फ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा सकते थे। लेकिन पुलिस ने इसे संज्ञेय अपराध मानकर जांच शुरू कर दी, जो कानून के दायरे से बाहर है। इस तरह की कार्रवाई से न केवल कानून का दुरुपयोग होता है, बल्कि लोगों को परेशान भी किया जाता है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे मामलों में सुधारात्मक कदम उठाएं। साथ ही संबंधित मजिस्ट्रेट को आदेश दिया गया है कि एफआईआर रद्द होने की प्रविष्टि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज की जाए।

दंपती की सुरक्षा पर जोर

अदालत ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इस दंपती के वैवाहिक जीवन में कोई बाधा न आए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बालिगों के निजी फैसलों का सम्मान करना जरूरी है और किसी भी तरह की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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