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Shakun Shastra: रात में क्यों रोते हैं कुत्ते और बिल्ली, बताए गए रहस्यों ने बढ़ाई जिज्ञासा

Shakun Shastra
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Shakun Shastra : भारतीय समाज में सदियों से यह मान्यता रही है कि प्रकृति और जीव-जंतुओं की गतिविधियों में कई तरह के संकेत छिपे होते हैं। घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि अगर रात के सन्नाटे में कोई जानवर लगातार रोए या असामान्य आवाजें करे, तो इसे साधारण घटना नहीं माना जाता। लोकमान्यताओं के अनुसार ऐसे संकेत किसी आने वाली घटना का इशारा हो सकते हैं। यही वजह है कि भारतीय संस्कृति में पशु-पक्षियों के व्यवहार को लेकर कई तरह की मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं।

भारतीय ज्योतिष और परंपराओं में ‘शकुन शास्त्र’ को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस शास्त्र में बताया गया है कि पशु-पक्षियों की कुछ हरकतें भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत दे सकती हैं।

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मान्यता है कि कई जानवरों में ऐसी संवेदनशीलता होती है जिससे वे वातावरण में होने वाले बदलाव या संभावित खतरे को पहले ही महसूस कर लेते हैं। इसे आम बोलचाल में ‘छठी इंद्री’ कहा जाता है। यही कारण है कि अचानक उनका बेचैन होना या अजीब तरीके से आवाज करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है। शकुन शास्त्र के अनुसार, अगर कोई कुत्ता रात के समय लगातार रोता या हुआँ-हुआँ की आवाज करता है, तो इसे शुभ संकेत नहीं माना जाता। लोकविश्वास के अनुसार यह किसी दुखद समाचार या अनहोनी की आशंका का संकेत हो सकता है। कुछ लोग इसे प्राकृतिक आपदाओं से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण अलग हो सकता है, लेकिन परंपरागत मान्यताओं में इस व्यवहार को हमेशा से गंभीर संकेत माना गया है।

बिल्ली का रोना क्यों माना जाता है चेतावनी

शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि यदि रात के समय घर के मुख्य द्वार के आसपास बिल्ली रोने लगे, तो इसे भी सामान्य घटना नहीं माना जाता। ज्योतिष शास्त्र में बिल्ली को राहु ग्रह से जोड़ा जाता है। इसलिए कुछ मान्यताओं के अनुसार इसका रोना घर में मानसिक तनाव, विवाद या अशांति की संभावना का संकेत माना जाता है। कई लोग इसे आसपास के वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा की मौजूदगी से भी जोड़ते हैं।

गाय का रात में रंभाना भी माना गया विशेष संकेत

गाय को भारतीय संस्कृति में पवित्र और शांत स्वभाव का पशु माना जाता है। आमतौर पर वह दिन के समय ही आवाज करती है, लेकिन यदि रात के समय अचानक वह बार-बार रंभाने लगे, तो शकुन शास्त्र इसे भी एक संकेत के रूप में देखता है। मान्यता है कि ऐसा व्यवहार आसपास किसी असामान्य परिस्थिति या संकट के आने की ओर इशारा कर सकता है।

प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है उल्लेख

पौराणिक साहित्य में भी पशुओं के व्यवहार को लेकर कई उल्लेख मिलते हैं। कुछ ग्रंथों में कहा गया है कि कुत्ते जैसे जानवर वातावरण में मौजूद अदृश्य या नकारात्मक शक्तियों को महसूस कर सकते हैं। इसी वजह से उनका रात में अचानक रोना कई बार रहस्यमय माना गया है। हालांकि आधुनिक विज्ञान इन मान्यताओं को अलग दृष्टि से देखता है, लेकिन भारतीय परंपरा और लोकविश्वास में इन संकेतों की चर्चा आज भी जारी है।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Headlines India News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

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