Kanpur News : मेडिकल साइंस तेजी से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही है। जहां पहले बड़ी सर्जरी के लिए बड़े चीरे लगाए जाते थे, वहीं अब “छोटा चीरा, बड़ा फायदा” वाली तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। इसी बदलाव के तहत कानपुर स्थित हैलट (एलएलआर) अस्पताल में मरीजों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नई सर्जरी यूनिट तैयार की जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल ब्लॉक में दिल्ली एम्स की तर्ज पर एक विशेष “मिनिमल एक्सेस सर्जरी विभाग” स्थापित किया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार यह विभाग सर्जरी विभाग के अंतर्गत एक अलग इकाई के रूप में काम करेगा।
इसके लिए दो आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए जा रहे हैं, जिनमें एक एंडोस्कोपी सुविधा से लैस होगा, जबकि दूसरे में 3डी और 4के लैप्रोस्कोपिक सिस्टम के साथ रोबोटिक सर्जरी की व्यवस्था होगी।
Kanpur में हैलट अस्पताल
मिनिमल एक्सेस सर्जरी ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसमें शरीर में बड़े चीरे के बजाय बेहद छोटे छेद के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है। इसे की-होल सर्जरी भी कहा जाता है। इस तकनीक में लैप्रोस्कोपिक, रोबोटिक और लेजर आधारित प्रक्रियाओं का उपयोग कर जटिल सर्जरी को कम आक्रामक तरीके से पूरा किया जाता है। इससे मरीज की रिकवरी तेजी से होती है और जोखिम भी कम रहता है। इस नए विभाग में अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम और 4K इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। हाल ही में विभागाध्यक्ष ने रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। इस तकनीक की मदद से डॉक्टर अधिक सटीकता के साथ ऑपरेशन कर सकेंगे, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना काफी कम हो जाएगी और इलाज की गुणवत्ता और बेहतर होगी।
मिलेंगे कई बड़े फायदे
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ मरीजों को तेजी से रिकवरी के रूप में मिलेगा। बड़े चीरे न लगने से दर्द कम होगा, संक्रमण का खतरा घटेगा और अस्पताल में भर्ती रहने का समय भी कम हो जाएगा। साथ ही शरीर पर लंबे और गहरे निशानों से भी छुटकारा मिलेगा, जो पारंपरिक सर्जरी में आम समस्या होती थी। मिनिमल एक्सेस सर्जरी अब केवल कुछ चुनिंदा बीमारियों तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग कैंसर, पेट और छाती की सर्जरी, थायराइड, मोटापा कम करने वाली बैरियाट्रिक सर्जरी, वैरिकोज वेन्स और यहां तक कि रीढ़ और मस्तिष्क से जुड़े ऑपरेशनों में भी किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में सर्जरी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है।
इस नई सुविधा के शुरू होने के बाद कानपुर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़े ऑपरेशनों के लिए दिल्ली, मुंबई या अन्य महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। अत्याधुनिक तकनीक अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
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