NCLT News : देश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में Adani Enterprises Limited ने एक अहम कदम उठाया है। कंपनी को National Company Law Tribunal की अहमदाबाद पीठ से ‘कम्पोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट’ के लिए मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद अदाणी समूह के भीतर एक बड़े कॉरपोरेट पुनर्गठन का रास्ता साफ हो गया है। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े कारोबार को एक मजबूत और केंद्रीकृत ढांचे में लाना है, ताकि भविष्य में इस सेक्टर में तेजी से विस्तार किया जा सके।
मंजूर की गई इस योजना के तहत अदाणी समूह की पांच कंपनियों को एक नए कॉरपोरेट स्ट्रक्चर में समायोजित किया जाएगा। इस पुनर्गठन का मकसद अलग-अलग इकाइयों में चल रहे ऑपरेशन्स को एकीकृत करना और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना है।
NCLT ने अदाणी ग्रुप की योजना को दी मंजूरी
कंपनी का मानना है कि इस कदम से ग्रीन हाइड्रोजन और उससे जुड़े डाउनस्ट्रीम उत्पादों के विकास के लिए एक मजबूत और संगठित प्लेटफॉर्म तैयार होगा। इसके जरिए न सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि भविष्य की परियोजनाओं को भी बेहतर दिशा मिल सकेगी। नई योजना के पहले हिस्से में Adani Green Technology Limited और Adani Emerging Businesses Private Limited का विलय उनकी मूल कंपनी Adani Enterprises Limited में किया जाएगा। इस विलय के बाद इन कंपनियों के कारोबार और परियोजनाओं को सीधे एंटरप्राइजेज के तहत संचालित किया जाएगा। शेयर स्वैप व्यवस्था के तहत AEBPL के शेयरधारकों को उनके पास मौजूद हर 553 शेयरों के बदले 11 इक्विटी शेयर दिए जाएंगे।
ग्रीन हाइड्रोजन यूनिट में होगा दूसरा बड़ा विलय
इस स्कीम के दूसरे चरण में Adani Tradecom Limited का विलय Adani New Industries Limited में किया जाएगा। कंपनी ने ANIL को ग्रीन हाइड्रोजन कारोबार की मुख्य इकाई के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। इस विलय के तहत ATL के हर 10 शेयरों के बदले ANIL एक इक्विटी शेयर जारी करेगी। इस प्रक्रिया के बाद ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े प्रोजेक्ट्स को एक ही प्लेटफॉर्म से संचालित किया जाएगा।
कुछ कंपनियां स्वतः हो जाएंगी समाप्त
पुनर्गठन योजना लागू होने के बाद Adani Green Technology Limited, Adani Emerging Businesses Private Limited और Adani Tradecom Limited का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इन कंपनियों के शेयर भी रद्द कर दिए जाएंगे और वे बिना किसी अलग लिक्विडेशन प्रक्रिया के समाप्त मानी जाएंगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य कारोबार को सरल बनाना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
ग्रीन हाइड्रोजन पर रहेगा फोकस
कंपनी की ओर से ट्रिब्यूनल में दी गई जानकारी के अनुसार इस पुनर्गठन का मुख्य लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को एक ही इकाई के तहत लाना है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा, उत्पादन तकनीक और हाइड्रोजन से जुड़े प्रोजेक्ट्स को एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य में भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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