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UP OTS Scheme 2026: कमर्शियल वाहन मालिकों को बड़ी राहत, बकाया टैक्स पर मिलेगी 35% तक छूट

Vahan Gadi Car

UP OTS Scheme 2026 : उत्तर प्रदेश सरकार ने कमर्शियल वाहन मालिकों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में परिवहन विभाग की एकमुश्त समाधान योजना (OTS) को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का उद्देश्य वर्षों से लंबित वाहन कर और उससे जुड़े विवादों का समाधान करना है। सरकार का मानना है कि इससे वाहन मालिकों को आर्थिक राहत मिलेगी और विभाग के अटके हुए राजस्व की वसूली भी आसान हो जाएगी। अब तक लागू की जाने वाली ओटीएस योजनाओं में मुख्य रूप से पेनल्टी या जुर्माने में राहत दी जाती थी।

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इस बार सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए मूल कर में भी छूट देने का फैसला किया है। नई योजना के तहत बकाया कर पर 35 प्रतिशत तक की राहत मिल सकेगी। वहीं, जुर्माने की राशि को पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था उन वाहन मालिकों के लिए राहत लेकर आई है, जो लंबे समय से बकाया कर के कारण आर्थिक दबाव का सामना कर रहे थे।

UP OTS Scheme 2026

सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद यह योजना सीमित अवधि के लिए लागू रहेगी। योजना दो महीने तक प्रभावी रहेगी, जिसके दौरान वाहन मालिक अपने लंबित मामलों का निपटारा कर सकेंगे। परिवहन विभाग को उम्मीद है कि इस अवधि में बड़ी संख्या में लोग आगे आकर अपने बकाये का भुगतान करेंगे। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 7.5 टन तक के हल्के व्यवसायिक वाहनों की संख्या 29 लाख से अधिक है। इनमें से करीब 8.48 लाख वाहनों पर कर बकाया है। यही कारण है कि सरकार ने विशेष राहत योजना लागू करने का फैसला लिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह प्रदेश की सबसे बड़ी कर निस्तारण योजनाओं में से एक साबित हो सकती है।

हजारों करोड़ रुपये का बकाया फंसा

विभागीय आंकड़े बताते हैं कि कमर्शियल वाहनों पर कुल बकाया राशि लगभग 1853 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुकी है। इसमें 1073 करोड़ रुपये से अधिक मूल कर शामिल है, जबकि करीब 780 करोड़ रुपये जुर्माने और पेनल्टी के रूप में दर्ज हैं। सरकार का अनुमान है कि राहत मिलने के बाद बड़ी संख्या में वाहन मालिक स्वेच्छा से भुगतान करेंगे, जिससे विभाग को महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त होगा। परिवहन विभाग ने इस योजना को तैयार करते समय राज्य में पहले लागू की गई बिजली बिल राहत योजना का भी अध्ययन किया।

उस योजना में सरचार्ज और ब्याज में छूट मिलने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपने पुराने बकाये जमा किए थे। इसी अनुभव के आधार पर परिवहन विभाग को उम्मीद है कि वाहन कर से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

दोनों को होगा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना दोनों पक्षों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। एक तरफ वाहन मालिकों को भारी आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर सरकार को वर्षों से अटका राजस्व प्राप्त होगा। इससे लंबित कर मामलों की संख्या कम होगी और परिवहन विभाग की वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी। ओटीएस योजना लागू होने से न केवल कर वसूली बढ़ेगी, बल्कि विभाग और वाहन मालिकों के बीच लंबे समय से चल रहे विवादों का भी समाधान होगा। यदि योजना को अपेक्षित प्रतिक्रिया मिलती है, तो आने वाले समय में इसे राजस्व संग्रहण के प्रभावी मॉडल के रूप में भी देखा जा सकता है।

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