UP State Highway Four Lane Project : उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के सड़क नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। एक्सप्रेस-वे और नेशनल हाईवे के बाद अब स्टेट हाईवे को भी हाईस्पीड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 18 जिलों से गुजरने वाले 21 स्टेट हाईवे को फोरलेन बनाने की योजना का सर्वे पूरा कर लिया है। प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया गया है और परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।प्रदेश में कुल 142 स्टेट हाईवे हैं। इनमें से 107 सड़कों को पहले ही लगभग 10 मीटर तक चौड़ा किया जा चुका है।
अब दूसरे चरण में 21 प्रमुख हाईवे को फोरलेन में बदला जाएगा। इसके बाद शेष 14 स्टेट हाईवे को भी चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना है। सरकार का उद्देश्य राज्य के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर और तेज संपर्क स्थापित करना है।
UP State Highway Four Lane Project
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लाभ प्रदेश के 18 जिलों को मिलने वाला है। वाराणसी की तीन और हरदोई की दो प्रमुख सड़कों सहित अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, देवरिया, कुशीनगर, जालौन, फर्रुखाबाद, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, बुलंदशहर, सोनभद्र, संभल, मुजफ्फरनगर, चंदौली और जौनपुर के कई महत्वपूर्ण मार्ग इसमें शामिल किए गए हैं। मौजूदा समय में इन सड़कों की चौड़ाई 7 से 14 मीटर के बीच है, जिसे बढ़ाकर 14 से 25 मीटर तक किया जाएगा।
कई महत्वपूर्ण मार्गों का होगा कायाकल्प
फोरलेन बनने वाली सड़कों में अमेठी की जगदीशपुर रोड प्रमुख है, जो कई जिलों को जोड़ती है। इसके अलावा देवरिया-पडरौना मार्ग को कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और कृषि विश्वविद्यालय से बेहतर कनेक्टिविटी के लिए विकसित किया जाएगा। जालौन का पानवाड़ी राजमार्ग, हरदोई का बीएसए स्टेट हाईवे और वाराणसी के चौबेपुर तथा कछवा मार्ग भी इस योजना का हिस्सा हैं। कई परियोजनाओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सफर होगा तेज
फोरलेन सड़क बनने के बाद वाहनों की औसत गति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। जहां वर्तमान में अधिकांश स्टेट हाईवे पर गाड़ियां 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं, वहीं नए फोरलेन मार्गों पर यह गति 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक हो जाएगी। नई फोरलेन सड़कों को केवल चौड़ा ही नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप भी विकसित किया जाएगा।
दोनों दिशाओं के ट्रैफिक को अलग रखने के लिए मजबूत डिवाइडर बनाए जाएंगे। सड़क किनारों और डिवाइडर पर क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे ताकि दुर्घटनाओं की स्थिति में नुकसान कम हो सके। रात और कोहरे में बेहतर दृश्यता के लिए रिफ्लेक्टिव मार्कर और साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।
रंबल स्ट्रिप और स्मार्ट चेतावनी प्रणाली
दुर्घटनाओं को कम करने के लिए हाईवे पर रंबल स्ट्रिप्स लगाई जाएंगी। ये विशेष पट्टियां वाहन गुजरने पर कंपन पैदा करती हैं, जिससे चालक सतर्क हो जाता है। इसके अलावा मोड़, जंक्शन और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों से पहले स्मार्ट चेतावनी संकेतक लगाए जाएंगे ताकि वाहन चालक समय रहते अपनी गति नियंत्रित कर सकें। हाईवे के किनारे बसे गांवों और कस्बों के लिए सर्विस लेन विकसित की जाएंगी। इससे स्थानीय वाहनों को मुख्य हाईवे पर आने की जरूरत कम होगी और ट्रैफिक सुचारु बना रहेगा। इसके साथ ही अंडरपास, ओवरपास और बाईपास जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी ताकि स्थानीय लोगों और पशुओं की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।
यात्रियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
फोरलेन हाईवे पर ट्रक पार्किंग, पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट, शौचालय और वाहन मरम्मत केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। आपातकालीन स्थिति में सहायता के लिए हेल्पलाइन, एम्बुलेंस सेवा और त्वरित प्रतिक्रिया टीम भी उपलब्ध रहेगी। कई स्थानों पर एसओएस कॉलिंग बॉक्स लगाए जाएंगे ताकि दुर्घटना या वाहन खराब होने की स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इन 21 स्टेट हाईवे का फोरलेन में विस्तार केवल सड़क परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास का भी बड़ा माध्यम बनेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को फायदा मिलेगा। साथ ही लोगों की यात्रा आसान, सुरक्षित और समय बचाने वाली बन सकेगी। दिसंबर 2027 तक परियोजना पूरी होने के बाद प्रदेश के सड़क ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।





