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UP Encounter Politics: गाजीपुर एनकाउंटर के बाद फिर गरमाई सियासत, योगी सरकार के एनकाउंटर आंकड़ों पर छिड़ी बहस

CM Yogi Adityanath speaking on Ghaziabad Surya Murder Case during Bijnor public event
बिजनौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद के सूर्या हत्याकांड पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कानून व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश दिया।

UP Encounter Politics : उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में चर्चित विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश के पुलिस एनकाउंटर के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। विपक्षी दल इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार इसे अपराधियों के खिलाफ अपनी सख्त नीति का हिस्सा बता रही है। घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष का कहना है कि ऐसी घटनाओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश न रहे।

CM Yogi Adityanath speaking on Ghaziabad Surya Murder Case during Bijnor public event

एनकाउंटर के बाद विनीत राय के परिवार की ओर से भी कई सवाल उठाए गए हैं। परिवार ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। दूसरी ओर विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रदेश में हो रहे एनकाउंटरों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखने की जरूरत है।

UP Encounter Politics

राज्य सरकार और भाजपा नेताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अपराध और माफिया तंत्र के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। सरकार का दावा है कि कानून तोड़ने वालों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जाती है और इसका उद्देश्य प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

योगी सरकार के दौरान हुए चर्चित एनकाउंटर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में कई हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर सुर्खियों में रहे हैं। इनमें कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे का एनकाउंटर सबसे ज्यादा चर्चित रहा। इसके अलावा बाराबंकी में टिंकू कपाला, लखनऊ में हमजा, झांसी में असद अहमद और मेरठ में अनिल दुजाना की मुठभेड़ों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी थी। इन कार्रवाइयों को सरकार ने अपराध नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा बताया, जबकि विपक्ष ने समय-समय पर इनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

एनकाउंटर के आंकड़ों को लेकर चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मार्च 2017 से सितंबर 2024 के बीच उत्तर प्रदेश में कुल 207 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। इन आंकड़ों में विभिन्न जातियों और समुदायों से जुड़े अपराधी शामिल हैं। आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने तर्क पेश कर रहे हैं। विपक्ष जहां इन आंकड़ों की अलग-अलग व्याख्या कर रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई किसी जाति, धर्म या वर्ग को देखकर नहीं बल्कि अपराध के आधार पर की जाती है। सरकार का दावा है कि कानून के सामने सभी समान हैं और कार्रवाई केवल अपराध के रिकॉर्ड और परिस्थितियों के आधार पर होती है।

NCRB के डेटा के मुताबिक यूपी में अपराध ग्राफ

अपराध 2017 2024
हत्या 4,324 3,215
अपहरण 19,921 11,773
फिरौती 46 26
बलात्कार 4,246 3,209
चोरी 60,434 43,598
डकैती 263 57

सबसे ज्यादा एनकाउंटर वाले जोन (मार्च 2017- मई 2026 तक)

जोन एनकाउंटर मौत घायल गिरफ्तार
मेरठ 4,813 97 3,513 8,921
आगरा 2,494 24 968 5,845
वाराणसी 1,292 29 907 2,426

कानून-व्यवस्था सरकार की बड़ी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात करते रहे हैं। सरकार की ओर से माफियाओं की संपत्तियों पर कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमे, बुलडोजर अभियान और विशेष पुलिस अभियानों को कानून-व्यवस्था सुधारने की रणनीति के रूप में पेश किया जाता है। गाजीपुर एनकाउंटर के बाद एक बार फिर प्रदेश में एनकाउंटर नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

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