Kanpur Dehat Land Scam : कानपुर देहात में वर्षों से चर्चा में रहे बहुचर्चित जमीन प्रकरण में अब प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। थर्मल पावर प्लांट की स्थापना के लिए अधिग्रहित की गई सरकारी भूमि को वापस ग्राम सभा के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर पूरा मामला सुर्खियों में आ गया है और प्रभावित किसान भी अपनी जमीन को लेकर नए फैसले की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
मामला भोगनीपुर तहसील क्षेत्र के चपरघटा गांव से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2011 में यहां बड़े औद्योगिक निवेश और बिजली उत्पादन परियोजना के नाम पर कुल 2332 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। उस समय क्षेत्र के लोगों को रोजगार, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और विकास के कई वादे किए गए थे।
Kanpur Dehat Land Scam
स्थानीय किसानों ने भी भविष्य की उम्मीदों के साथ अपनी जमीन परियोजना के लिए उपलब्ध कराई थी। लेकिन समय बीतता गया और जिस परियोजना को क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाला बताया गया था, वह कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। करीब डेढ़ दशक गुजर जाने के बाद भी इलाके में न तो थर्मल पावर प्लांट स्थापित हो सका और न ही स्थानीय लोगों को रोजगार या विकास का कोई बड़ा लाभ मिला। इससे किसानों और ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बढ़ती रही। लोगों का कहना है कि जिन वादों के आधार पर जमीन ली गई थी, वे कभी पूरे नहीं हुए। परियोजना की असफलता के बाद अब जमीन और उससे जुड़े आर्थिक नुकसान का मुद्दा फिर से प्रमुखता से उठने लगा है।
नियमानुसार दुरुस्त
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। आरोप है कि अधिग्रहित भूमि को आधार बनाकर विभिन्न बैंकों से भारी रकम का ऋण लिया गया। बाद में परियोजना आगे नहीं बढ़ी और संबंधित कंपनियां सक्रिय रूप से सामने नहीं आईं। इसी क्रम में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित गड़बड़ियों की जांच शुरू हुई, जिसके बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर 761 एकड़ सरकारी भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्ति को सुरक्षित रखना प्राथमिकता है और भूमि अभिलेखों को भी नियमानुसार दुरुस्त किया जाएगा। इस कार्रवाई को पूरे मामले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक पहल माना जा रहा है।
दर्ज हुई एफआईआर
जांच के बाद मामले में कई जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों, संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों और कुछ बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और दस्तावेजों की पड़ताल जारी है। सरकारी जमीन को लेकर कार्रवाई शुरू होने के बावजूद किसानों की चिंता अब भी खत्म नहीं हुई है। करीब 1400 एकड़ निजी भूमि का मुद्दा अभी भी समाधान का इंतजार कर रहा है। किसानों का कहना है कि यदि सरकारी भूमि वापस कराई जा सकती है तो उनकी जमीन के संबंध में भी स्पष्ट नीति और निर्णय सामने आना चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि या तो उनकी भूमि वापस की जाए या फिर उन्हें उचित और न्यायसंगत राहत प्रदान की जाए।
अगली कार्रवाई पर टिकी सबकी नजर
प्रशासन रिकॉर्ड दुरुस्त करने और सरकारी भूमि को सुरक्षित करने की प्रक्रिया में जुटा है। दूसरी ओर हजारों किसान अपनी निजी जमीन के भविष्य को लेकर सरकार और प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाले फैसले न केवल प्रभावित किसानों बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अहम साबित हो सकते हैं।
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