UP Election Survey : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए जहां लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ रणनीति बना रहा है. इस बीच Matrize के एक चुनावी सर्वे में प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को लेकर अनुमान सामने आए हैं. सर्वे के मुताबिक मौजूदा स्थिति में एनडीए को INDIA गठबंधन के मुकाबले अधिक सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है.
हालांकि ये आंकड़े चुनाव परिणाम नहीं बल्कि सर्वे के समय मतदाताओं से मिले फीडबैक पर आधारित अनुमान हैं. चुनाव में अभी समय बाकी है और उम्मीदवार, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे तथा प्रचार अभियान जैसे कई कारक मतदाताओं के अंतिम फैसले को प्रभावित कर सकते हैं.
UP Election Survey
Matrize के सर्वे में उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में एनडीए को 245 से 265 सीटें मिलने का अनुमान दिया गया है. वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस वाले INDIA गठबंधन को 135 से 155 सीटों की रेंज में रखा गया है. सर्वे में बहुजन समाज पार्टी को 1 से 3 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है. अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 5 से 10 सीटें जाने की संभावना सर्वे में जताई गई है. ये सभी आंकड़े सर्वे के अनुमान हैं, वास्तविक चुनाव परिणाम नहीं. वोट प्रतिशत के मामले में सर्वे ने एनडीए को 44 फीसदी वोट मिलने का अनुमान दिया है. INDIA गठबंधन का अनुमानित वोट शेयर 38 फीसदी बताया गया है. इस तरह दोनों गठबंधनों के बीच छह प्रतिशत का अंतर दिखाया गया है. बसपा को 8 फीसदी और अन्य को 10 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है.
कुर्मी-कोइरी वोटों पर सभी की नजर
उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरण में गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. सर्वे से जुड़े विश्लेषण में कुर्मी और कोइरी मतदाताओं के रुख पर भी चर्चा की गई. आकलन के मुताबिक इन मतदाताओं का पूरी तरह किसी एक विपक्षी दल की ओर स्थानांतरण दिखाई नहीं देता. हालांकि चुनाव तक इन समुदायों का वास्तविक रुख क्या होगा, इसका फैसला मतदान के बाद ही सामने आएगा. सर्वे से जुड़े विश्लेषण में मुस्लिम और यादव मतदाताओं के बीच समाजवादी पार्टी के समर्थन को अपेक्षाकृत मजबूत बताया गया है. ये दोनों समुदाय लंबे समय से सपा के प्रमुख सामाजिक आधार में गिने जाते रहे हैं. इसके बावजूद अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार और स्थानीय समीकरण मतदान के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं.
ब्राह्मण वोटों को लेकर भी हुआ आकलन
ब्राह्मण और दूसरे सवर्ण मतदाताओं के रुख पर भी सर्वे से जुड़े विश्लेषण में चर्चा हुई. इसमें दावा किया गया कि सरकार से किसी स्तर पर असंतुष्ट होने वाले ब्राह्मण मतदाताओं का सपा की तरफ जाना जरूरी नहीं है. उनके पास बसपा सहित दूसरे विकल्प हो सकते हैं या कुछ मतदाता मतदान से दूरी भी बना सकते हैं. यह सर्वे से जुड़ा विश्लेषण है, पूरे समुदाय के मतदाताओं की एक जैसी राजनीतिक पसंद नहीं मानी जा सकती. एससी मतदाताओं को लेकर सर्वे के जमीनी फीडबैक में कानून व्यवस्था को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है. विश्लेषण में दावा किया गया कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध, अवैध कब्जे और सुरक्षा जैसे विषयों को लेकर सरकार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. हालांकि दलित मतदाता एक समान राजनीतिक समूह नहीं हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में उनका मतदान व्यवहार अलग हो सकता है.
मतदाताओं की नजर
सर्वे से जुड़े विश्लेषण के मुताबिक मतदाताओं के बीच रोजगार, विकास, कानून व्यवस्था और स्थानीय समस्याएं प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं. इसलिए चुनावी मुकाबला केवल जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रहने वाला है. प्रत्याशियों की छवि और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहेगा. Matrize के मौजूदा आंकड़े चुनाव से पहले मतदाताओं के रुख का एक सर्वे आधारित अनुमान पेश करते हैं. इसे 2027 के अंतिम चुनाव परिणाम के तौर पर नहीं देखा जा सकता. आने वाले महीनों में टिकट वितरण, सपा-कांग्रेस का सीट बंटवारा, एनडीए सहयोगियों की रणनीति और बसपा की चुनावी तैयारी के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं. ऐसे में 403 सीटों की वास्तविक तस्वीर मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी.
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