Strait of Hormuz : दुनिया के अहम व्यापारिक रास्ते अब सिर्फ आवाजाही का जरिया नहीं रह गए हैं। समुद्री, हवाई और जमीनी मार्ग अब भू-राजनीतिक ताकत दिखाने और आर्थिक दबाव बनाने का माध्यम बनते जा रहे हैं। हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि देशों की नजर अब इन रूट्स से कमाई करने पर भी है, जिससे वैश्विक व्यापार का संतुलन बदल सकता है।
हाल ही में Strait of Hormuz में ईरान द्वारा जहाजों पर नियंत्रण की कोशिश और Strait of Malacca पर इंडोनेशिया के प्रस्ताव ने बहस तेज कर दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या देशों को इन रास्तों से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार होना चाहिए।
Strait of Hormuz
इंडोनेशिया ने अप्रैल 2026 में मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते इसे कुछ ही घंटों में वापस लेना पड़ा। यह दिखाता है कि ऐसे फैसलों पर दुनिया की प्रतिक्रिया कितनी तेज और कड़ी हो सकती है। वैश्विक स्तर पर ट्रांजिट शुल्क को लेकर कोई एक समान नियम नहीं है। हवाई, समुद्री और जमीनी मार्गों में अलग-अलग व्यवस्था लागू होती है। हर देश अपनी जरूरत और समझौते के आधार पर शुल्क तय करता है, जिससे यह सिस्टम काफी जटिल हो जाता है।
हवाई मार्ग में शुल्क और विवाद
हवाई मार्ग में देशों को अपने एयरस्पेस पर पूरा अधिकार होता है। वे ओवरफ्लाइट चार्ज ले सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत तय होते है लेकिन कई बार राजनीतिक तनाव इस व्यवस्था को प्रभावित करता है। जैसे एयरस्पेस बंद होने पर विमानों को लंबा रास्ता लेना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। दुनिया का करीब 80 प्रतिशत व्यापार समुद्र के रास्ते होता है। ऐसे में Suez Canal, Panama Canal और Bab el-Mandeb जैसे मार्ग बेहद अहम हो जाते हैं। यहां किसी भी तरह की रुकावट या शुल्क का असर सीधे वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ता है।
कानूनी ढांचा और सीमाएं
United Nations Convention on the Law of the Sea के तहत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से फ्री ट्रांजिट की व्यवस्था दी गई है। इसका मतलब है कि देश सिर्फ सीमित सेवा शुल्क ही ले सकते हैं। हालांकि, इसका पालन पूरी तरह देशों की सहमति पर निर्भर करता है, न कि सख्त कानून पर। ईरान अब Strait of Hormuz को सिर्फ नियंत्रित करने ही नहीं, बल्कि उससे कमाई करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। प्रस्ताव के तहत जहाजों से शुल्क लेने और परमिट सिस्टम लागू करने की बात सामने आई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम पश्चिमी प्रतिबंधों का जवाब हो सकता है।
जमीनी और क्षेत्रीय असमानता
जमीनी मार्गों में नियम पूरी तरह द्विपक्षीय समझौतों पर आधारित होते हैं। वहीं, यूरोप में एकीकृत व्यवस्था के तहत सामान बिना रुकावट के चलता है। इससे साफ है कि हर क्षेत्र का अपना अलग मॉडल है, जो वैश्विक स्तर पर एकरूपता को मुश्किल बनाता है। वैश्विक व्यापार अब पहले से ज्यादा जटिल हो गया है। छोटे-छोटे फैसले भी बड़े असर डाल सकते हैं। यह सिस्टम जितना जुड़ा हुआ है, उतना ही संवेदनशील भी बन गया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि देश इन रास्तों को सहयोग के जरिए संभालते हैं या इन्हें दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
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