Russia Doomsday Bunker : रूस के एक पहाड़ी इलाके में बने भूमिगत सैन्य ठिकाने को लेकर नई जानकारी सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार एक ऐसे सुरक्षित कमांड सेंटर का विस्तार कर रही है, जहां से परमाणु हमले जैसी स्थिति में भी देश की सैन्य गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकेगा। यूराल पर्वतीय क्षेत्र में स्थित इस ठिकाने को रूस की परमाणु जवाबी कार्रवाई से जुड़ी व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि, रूसी सरकार ने इसके मौजूदा इस्तेमाल और निर्माण से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोस्विनस्की कामेन पहाड़ के नीचे मौजूद इस सैन्य परिसर को बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है। इसे फैसिलिटी 1335 के नाम से जाना जाता है। यहां सुरंगों, सुरक्षित कमरों और आधुनिक संचार सुविधाओं के विस्तार की बात सामने आई है।
Russia Doomsday Bunker
बताया जा रहा है कि परिसर में 24 कमरों वाली सुरंग और बाहरी सुरक्षा के लिए मशीन गन बुर्ज जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इस ठिकाने का इतिहास शीत युद्ध के दौर से जुड़ा है। उस समय इसे इस उद्देश्य से तैयार किया गया था कि किसी बड़े परमाणु हमले के बाद भी रूस का सैन्य नेतृत्व अपनी जवाबी कार्रवाई जारी रख सके। इस भूमिगत परिसर की चर्चा रूस की परमाणु कमांड प्रणाली ‘डेड हैंड’ के कारण भी हो रही है। इसे पेरिमीटर सिस्टम के नाम से भी जाना जाता है। इसका उद्देश्य ऐसे हालात में जवाबी हमले की क्षमता बनाए रखना है, जब परमाणु हमले के कारण देश के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य कमांड के बीच संपर्क टूट जाए।
इस व्यवस्था में बैकअप संचार चैनल और विशेष सिग्नल प्रणाली की भूमिका बताई जाती है। हालांकि, इसे पूरी तरह बिना किसी मानवीय नियंत्रण के काम करने वाली प्रणाली कहना सही नहीं होगा। इसके मौजूदा संचालन और तकनीकी क्षमताओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
इस्तेमाल हुआ हजारों टन स्टील
निर्माण से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर दावा है कि वर्ष 2018 के बाद इस परिसर में बड़े पैमाने पर खुदाई और निर्माण सामग्री पहुंचाने का काम हुआ। परियोजना में करीब 20 हजार टन स्टील, 30 लाख लीटर ईंधन और 8 लाख 23 हजार लीटर गैस इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा पहाड़ के भीतर वेंटिलेशन और विशेष एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने की बात भी कही गई है। इनका उद्देश्य रासायनिक, जैविक और रेडियोएक्टिव प्रदूषण से परिसर के अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित रखना है। निर्माण संबंधी अधिकांश गतिविधियां 2020 और 2021 के दौरान होने का दावा किया गया है।
क्या परमाणु युद्ध की तैयारी कर रहा रूस?
यूक्रेन युद्ध के बीच रूस और पश्चिमी देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे समय में इस भूमिगत सैन्य परिसर के विस्तार ने परमाणु सुरक्षा और जवाबी हमले की रणनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, बंकर का विस्तार होने का मतलब यह नहीं है कि रूस तत्काल परमाणु युद्ध शुरू करने जा रहा है। पुतिन के इस ठिकाने में शरण लेने की योजना की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल इसे रूस की उस सैन्य रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसका मकसद किसी बड़े हमले के बाद भी अपनी परमाणु जवाबी क्षमता को सुरक्षित रखना है।




