UP Assembly Election 2027 : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पूर्वांचल एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक, यहां की सीटों पर राजनीतिक दलों की नजर है। इसी बीच न्यूज लीडर और मैटराइज के ओपिनियन पोल में पूर्वांचल की 130 विधानसभा सीटों को लेकर अलग-अलग दलों के संभावित प्रदर्शन का आकलन सामने आया है।
23 सितंबर को सामने आए सर्वे में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के लिए 80 सीटों का अनुमान दिया गया है। समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगियों को 47, बहुजन समाज पार्टी को एक और अन्य उम्मीदवारों को दो सीटें मिलने का अनुमान है। ये आंकड़े चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के हैं, वास्तविक चुनाव परिणाम नहीं।
UP Assembly Election 2027
सर्वे के विधानसभा क्षेत्रवार आकलन में गोरखपुर की सभी नौ और वाराणसी की सभी आठ सीटों पर एनडीए के पक्ष में अनुमान जताया गया है। देवरिया और कुशीनगर की सात-सात सीटों के साथ मिर्जापुर तथा सिद्धार्थनगर की पांच-पांच सीटों पर भी इसी गठबंधन के लिए अनुकूल आंकड़े दिए गए हैं। सर्वे में आजमगढ़ की दस और मऊ की चार विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी तथा उसके सहयोगियों के पक्ष में अनुमान सामने आया है। जौनपुर की नौ में से आठ सीटें सपा गठबंधन और एक एनडीए के खाते में दिखाई गई है। वहीं गाजीपुर की सात सीटों में छह पर सपा गठबंधन और एक पर एनडीए का अनुमान है।
प्रयागराज में अलग समीकरण
प्रयागराज को लेकर सर्वे में एनडीए के लिए 11 और सपा गठबंधन के लिए एक सीट का अनुमान दिया गया है। इस तरह पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में दोनों प्रमुख गठबंधनों के लिए एक जैसी स्थिति नहीं दिखाई गई है। यही वजह है कि क्षेत्र के कुल आंकड़ों के साथ जिलेवार अनुमानों की भी चर्चा हो रही है। बहुजन समाज पार्टी को पूर्वांचल की रसड़ा विधानसभा सीट मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं अन्य उम्मीदवारों के खाते में कुंडा और बाबागंज की दो सीटें दिखाई गई हैं। सर्वे में इन सीटों को प्रमुख गठबंधनों से अलग रखा गया है।
जहूराबाद सीट को लेकर भी चर्चा
सर्वे के अनुसार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर की जहूराबाद सीट पर भी मुकाबले का अलग आकलन सामने आया है। इसमें उनकी हार का अनुमान जताया गया है। हालांकि किसी एक सीट के ओपिनियन पोल को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। प्रत्याशियों, गठबंधन और स्थानीय चुनावी परिस्थितियों में बदलाव से वास्तविक मुकाबले की तस्वीर अलग हो सकती है।
चुनाव से पहले सर्वे को कैसे समझें?
न्यूज लीडर-मैटराइज के आंकड़े सितंबर 2026 के चुनाव पूर्व आकलन हैं। मतदान से पहले मतदाताओं की राय, प्रत्याशियों के नाम और दलों की रणनीति में बदलाव संभव है। इसलिए पूर्वांचल की इन 130 सीटों का अंतिम फैसला 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदाता ही करेंगे।





