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Reliance vs IT Stocks: रिलायंस की मार्केट कैप भारत की टॉप-5 आईटी कंपनियों के बराबर, जानिए कैसे बदली तस्वीर

Reliance vs IT Stocks : भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) अब भारत की पांच सबसे बड़ी आईटी कंपनियों की संयुक्त मार्केट कैपिटल के लगभग बराबर पहुंच गया है। एक समय ऐसा भी था जब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) मार्केट वैल्यू के मामले में रिलायंस को कड़ी टक्कर देती थी और कुछ अवसरों पर उसे पीछे भी छोड़ चुकी थी। हालांकि, मौजूदा समय में दोनों के बीच का अंतर काफी बढ़ गया है।

इस वर्ष आईटी सेक्टर निवेशकों के लिए सबसे कमजोर क्षेत्रों में शामिल रहा है। इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में वर्ष 2026 में अब तक 36 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

Reliance vs IT Stocks

इसके चलते इन पांच कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण घटकर करीब 18.12 लाख करोड़ रुपये रह गया है। दूसरी ओर, शुक्रवार के कारोबारी सत्र के अंत तक रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप लगभग 18 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। हालांकि, केवल आईटी कंपनियां ही दबाव में नहीं रहीं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी इस साल अब तक 17 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव, विशेष रूप से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव का असर कंपनी के शेयर पर भी देखने को मिला। पिछले महीने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर रिलायंस का शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर 1,253.20 रुपये तक पहुंच गया था। बाद में इसमें कुछ सुधार जरूर देखने को मिला।

सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट की बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। AI आधारित नई तकनीकों और स्टार्टअप्स के तेजी से उभरने के कारण पारंपरिक आईटी सर्विस मॉडल पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ और आईटी शेयरों में बिकवाली तेज हो गई। हालांकि, बाजार में यह उम्मीद भी बनी हुई है कि AI का असर शुरुआती अनुमान से कम हो सकता है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि आईटी सेक्टर की रिकवरी फिलहाल पूरी तरह मजबूत नहीं दिख रही।

कई ब्रोकरेज संस्थानों का भी मानना है कि आने वाले समय में आईटी कंपनियों की आय और कारोबार वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रह सकती है। यही वजह है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल इस सेक्टर के प्रति सतर्क बना हुआ है।

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