Ramavatar Jaggi Murder Case : रामअवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को उनकी सरेंडर डेडलाइन थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद उनकी गिरफ्तारी और सजा की प्रक्रिया पर अस्थायी विराम लग गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामला दो आदेशों से जुड़ा है। पहला, सीबीआई को अपील की अनुमति और दूसरा, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का वह फैसला जिसमें अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने दोनों पर सुनवाई के बाद यह अंतरिम राहत दी है।
Ramavatar Jaggi Murder Case
इससे पहले बिलासपुर हाई कोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। साथ ही उन्हें 23 अप्रैल तक सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यह पूरा मामला रामअवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है। 4 जून 2003 को रायपुर में मौदहापारा थाना क्षेत्र के पास उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में अमित जोगी समेत 29 लोगों को आरोपी बनाया गया था। शुरुआत में निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने फैसला पलट दिया।
सबूतों पर सवाल
अमित जोगी के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इसी आधार पर उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। कोर्ट ने इन तर्कों को सुनने के बाद फिलहाल सजा पर रोक लगा दी है और आगे की सुनवाई तक राहत दे दी है। इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जोगी के समर्थकों में खुशी का माहौल है, जबकि विपक्षी दल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस केस का असर आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई अहम होगी, जहां सीबीआई अपना पक्ष रखेगी। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद ही यह तय होगा कि अमित जोगी को राहत मिलती है या सजा बरकरार रहती है। फिलहाल के लिए उन्हें मिली यह राहत बड़ी मानी जा रही है।
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