PM Modi : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार दोपहर गुरु रविदास के प्रकाश पर्व पर जालंधर स्थित डेरा बल्लां पहुंच रहे हैं। इस मौके पर उनका कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक बताया जा रहा है, लेकिन समय और स्थान दोनों को देखते हुए इस दौरे को साधारण नहीं माना जा रहा। डेरा बल्लां दोआबा क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक रूप से खास प्रभाव रखता है, ऐसे में प्रधानमंत्री की मौजूदगी को दूरगामी संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ ही दिन पहले डेरा बल्लां प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री देने की घोषणा हुई थी। इसके महज पखवाड़े भर बाद प्रधानमंत्री का डेरा पहुंचना महज संयोग नहीं माना जा रहा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह घटनाक्रम राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बेहद अहम संदेश देता है, खासकर उस समाज के लिए जिसकी दोआबा में निर्णायक भूमिका रही है।
PM मोदी ने गुरु रविदास जी को किया नमन
भाजपा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि प्रधानमंत्री केवल गुरु रविदास के प्रकाश पर्व पर नमन करने आ रहे हैं, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, जमीन पर तस्वीर कुछ और दिखती है। दोआबा की राजनीति में डेरा बल्लां का असर किसी से छिपा नहीं है और ऐसे में प्रधानमंत्री की यात्रा को पूरी तरह गैर-राजनीतिक मानना आसान नहीं।
मानवता के अनन्य उपासक महान संत श्री गुरु रविदास महाराज जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव…
— Narendra Modi (@narendramodi) February 1, 2026
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री लुधियाना के हलवारा में बने एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही जालंधर के आदमपुर एयरपोर्ट का नाम गुरु रविदास के नाम पर रखने की औपचारिक घोषणा भी प्रस्तावित है। यह फैसला धार्मिक सम्मान के साथ-साथ सामाजिक पहचान से भी जुड़ा माना जा रहा है, जिसने पहले ही राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
रविदासिया समाज पर सभी की नजर
प्रधानमंत्री के दौरे की घोषणा होते ही अलग-अलग राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण, रविदासिया समुदाय को अलग धार्मिक पहचान देने जैसी मांगें फिर से चर्चा में आ गई हैं। इससे साफ है कि हर पार्टी की नजर इस प्रभावशाली वोट बैंक पर टिकी हुई है। प्रधानमंत्री जिस वाराणसी संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं, उसे गुरु रविदास की जन्मस्थली माना जाता है। ऐसे में डेरा बल्लां में उनकी मौजूदगी केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रह जाती, बल्कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक बन जाती है। यही वजह है कि यह दौरा पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।





