Officers : अगर आपने कभी किसी सरकारी दफ्तर का दौरा किया है, तो एक चीज जरूर नोटिस की होगी कि बड़े अधिकारियों की कुर्सी पर सफेद तौलिया बिछा होता है। देखने में साधारण लगने वाली यह चीज दरअसल एक लंबी परंपरा और खास वजह से जुड़ी हुई है। कुर्सियों पर सफेद तौलिया रखने का चलन British Raj के समय से माना जाता है। उस दौर में अंग्रेज अधिकारी अक्सर घोड़ों से सफर करते थे।
धूल, मिट्टी और पसीने से बचने के लिए वे अपने साथ तौलिया रखते थे, जिसे बैठने के समय कुर्सी पर बिछा लिया जाता था। उस समय न तो पक्की सड़कें थीं और न ही आधुनिक सुविधाएं। लंबे सफर के बाद शरीर पसीने और धूल से भर जाता था।
Officers की कुर्सी
ऐसे में सफेद तौलिया एक तरह से साफ-सफाई और आराम बनाए रखने का आसान तरीका था। धीरे-धीरे यह आदत दफ्तरों में भी शामिल हो गई। भारत जैसे गर्म देश में पुराने समय में दफ्तरों में एयर कंडीशनर नहीं होते थे। सिर्फ पंखों के सहारे काम चलता था, जिससे गर्मी और पसीना आम बात थी। ऐसे में कुर्सी पर बिछा तौलिया पसीना सोखने का काम करता था और कपड़ों को खराब होने से बचाता था।
90 के दशक तक बना रहा ट्रेंड
समय के साथ दफ्तरों में सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन 90 के दशक तक यह तौलिया अफसरों की दिनचर्या का हिस्सा बना रहा। चाहे दफ्तर हो या सरकारी गाड़ी, तौलिया हर जगह इस्तेमाल होता था और इसे एक जरूरी चीज माना जाता था। आज लगभग सभी सरकारी दफ्तरों में एसी और आधुनिक कुर्सियां मौजूद हैं। इसके बावजूद कुर्सी पर तौलिया रखने की परंपरा खत्म नहीं हुई है। अब यह सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि एक आदत और सिस्टम का हिस्सा बन चुकी है।
रुतबे और पहचान से जुड़ा मामला
मौजूदा समय में सफेद तौलिया को कई जगह अधिकारियों के रुतबे से जोड़कर देखा जाता है। यह एक तरह का संकेत बन गया है कि यह सीट किसी वरिष्ठ अधिकारी की है। इसी तरह अन्य चीजें जैसे बड़ी मेज या अलग कुर्सी भी पद को दर्शाती हैं। सरकारी सिस्टम में कई छोटे-छोटे प्रतीक होते हैं, जो पद और अधिकार को दिखाते हैं। तौलिया भी उन्हीं में से एक है। यह परंपरा भले ही पुराने समय की देन हो, लेकिन आज भी यह प्रशासनिक संस्कृति का हिस्सा बनी हुई है।
आज के दौर में सवाल उठता है कि क्या इस परंपरा की अब जरूरत है या यह सिर्फ आदत बन चुकी है। लेकिन इतना तय है कि सफेद तौलिया अब केवल कपड़ा नहीं, बल्कि एक लंबे इतिहास और सिस्टम की पहचान बन चुका है।
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