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Varanasi की गुलाबी मीनाकारी का नया ट्रेंड, काशी विश्वनाथ मंदिर से बुलडोजर तक की रेप्लिका की विदेशों में डिमांड

Varanasi News : वाराणसी की विश्वप्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी कला नए दौर में नई पहचान बना रही है। पारंपरिक आभूषणों तक सीमित रहने वाली यह कला अब काशी की पहचान से जुड़े प्रतीकों की आकर्षक रेप्लिका तैयार कर रही है। काशी विश्वनाथ मंदिर, रोपवे, योग करती आकृतियां और बुलडोजर जैसे डिजाइन देश ही नहीं, विदेशों में भी लोकप्रिय हो रहे हैं। इससे मीनाकारी कारोबार को नया बाजार मिला है और कारीगरों की आय भी बढ़ी है। नेशनल अवॉर्डी और गुलाबी मीनाकारी के मास्टर आर्टिजन कुंज बिहारी सिंह ने बताया कि उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर की चांदी की रेप्लिका तैयार की है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पसंद कर चुके हैं।

इस कलाकृति को मुख्यमंत्री कई बार प्रधानमंत्री को भी भेंट कर चुके हैं। इस रेप्लिका को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगता है और इसमें 200 ग्राम से अधिक चांदी का उपयोग होता है। इसकी कीमत लगभग 90 हजार रुपये है। मंदिर के सामने विराजमान नंदी की बारीक आकृति भी इसकी विशेष आकर्षण है।

Varanasi की गुलाबी मीनाकारी का नया ट्रेंड

इसके अलावा योग करती चांदी की प्रतिमा भी पूर्वांचल में काफी पसंद की जा रही है। इसे बनाने में लगभग 100 ग्राम चांदी का इस्तेमाल होता है और इसकी कीमत करीब 36 हजार रुपये है। काशी के रोपवे और बुलडोजर की मीनाकारी रेप्लिका भी बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। जीआई एक्सपर्ट डॉ. रजनीकांत के अनुसार, वाराणसी में गोलघर से विशेश्वरगंज तक करीब 50 परिवार गुलाबी मीनाकारी से जुड़े हैं और इस कला का वार्षिक कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल चुका है और इसे उत्तर प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना में भी शामिल किया गया है।

800 डिग्री तापमान पर निखरती है चमक

कुंज बिहारी सिंह बताते हैं कि गुलाबी मीनाकारी की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनोखा गुलाबी रंग है, जिसे गोल्ड ऑक्साइड और चंदन के तेल जैसे विशेष प्राकृतिक तत्वों से तैयार किया जाता है। इसे धातु पर बेहद बारीकी से लगाने के बाद करीब 800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पकाया जाता है। इस प्रक्रिया में मीना धातु के साथ स्थायी रूप से जुड़ जाता है, जिससे इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है। कारीगरों का मानना है कि समय के साथ शरीर की गर्मी मिलने पर इसकी चमक और भी बढ़ जाती है।

विदेशी बाजार में बढ़ी मांग

विदेशी बाजार की जरूरतों को देखते हुए अब पारंपरिक गहनों के साथ-साथ फ्यूजन ज्वेलरी, पेंडेंट, ईयररिंग्स और आधुनिक डिजाइन वाले उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। यही वजह है कि वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी की मांग लगातार बढ़ रही है और यह कला अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बना रही है।

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