Muharram 2026 : मोहर्रम की नौवीं के अवसर पर प्रयागराज में गम-ए-हुसैन की रस्में पूरे अकीदत और एहतराम के साथ अदा की जा रही हैं। शहर के विभिन्न इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर मातमी मजलिसों, नौहाख्वानी और फातेहा का सिलसिला लगातार जारी है। गुरुवार को मोहर्रम की नौवीं पर ऐतिहासिक मासूम अली असगर का झूला और बुड्ढा ताजिया पूरे शानो-शौकत के साथ निकाला जाएगा। देर रात दोनों अपने पारंपरिक मार्गों से गुजरते हुए शहर में गश्त करेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार मासूम अली असगर का झूला अपने निर्धारित पुराने मार्गों से निकाला जाएगा।
बुड्ढा इमामबाड़ा से बुड्ढा ताजिया भी जुलूस के रूप में रवाना होगा। इस दौरान श्रद्धालु रास्ते भर इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए मातम करेंगे। हालांकि इस वर्ष बड़ा ताजिया नहीं उठाया जाएगा और उसे इमामबाड़े में जियारत के लिए रखा जाएगा।
Muharram 2026
मोहर्रम के जुलूसों को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस और आरएएफ के जवान लगातार निगरानी कर रहे हैं, जबकि ड्रोन कैमरों की मदद से जुलूस मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य पर्व को पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराना है।
उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़
नम्मू नियाज़ी सब्जी मंडी की प्रसिद्ध मेहंदी भी पूरे धार्मिक उत्साह के साथ निकाली गई। मेहंदी को कंधा देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ‘या अली’ और ‘या हुसैन’ के नारों के बीच मेहंदी को पारंपरिक मार्गों से गुजारा गया। आयोजन के दौरान स्वयंसेवकों और कमेटी के सदस्यों ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चक जीरो रोड स्थित इमामबाड़ा डिप्टी जाहिद हुसैन में आयोजित मजलिस में मौलाना सैयद ज़मीर हैदर रिज़वी ने कर्बला के वीर योद्धा और फौज-ए-हुसैनी के अलमबरदार गाजी अब्बास की शहादत का विस्तार से जिक्र किया। मजलिस की शुरुआत सोजख्वानी से हुई, जिसके बाद दुलदल और परचम-ए-अब्बास की जियारत कराई गई। हजारों जायरीन ने श्रद्धापूर्वक जियारत की और मातमी अंजुमनों ने नौहाख्वानी के बीच गम का इजहार किया।
आस्था और शहादत की याद का पर्व
मोहर्रम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि कर्बला के शहीदों की कुर्बानी, इंसाफ और सच्चाई के लिए किए गए संघर्ष को याद करने का प्रतीक भी है। प्रयागराज में चल रहे आयोजन इसी संदेश को जीवंत बनाए हुए हैं, जहां अकीदतमंद इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहे हैं।
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