Home » उत्तर प्रदेश » Kisan News: जामुन की खेती से बदल रही किसानों की किस्मत, बागवानी और नर्सरी से सालाना लाखों की कमाई

Kisan News: जामुन की खेती से बदल रही किसानों की किस्मत, बागवानी और नर्सरी से सालाना लाखों की कमाई

Kisan News : आगरा की किरावली तहसील के कुकथला गांव में पारंपरिक खेती के साथ जामुन की बागवानी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है। गांव के सैकड़ों किसान वर्षों से जामुन के बाग तैयार कर रहे हैं और अब इसके साथ नर्सरी का कारोबार भी कर रहे हैं। बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छे दाम मिलने से इस बार किसानों को पहले की तुलना में अधिक मुनाफा हुआ है। किसान जीवन सिंह कुशवाह ने बताया कि उनके दो बीघा खेत में लगभग 40 वर्ष पुराना जामुन का बाग है, जिसमें करीब 80 पेड़ लगे हैं।

खेत की मेड़ों पर जामुन के पेड़ हैं, जबकि बाकी हिस्से में आंवला, अशोक, सेब और नाशपाती के पौधों की नर्सरी तैयार की जाती है। उन्होंने बताया कि जामुन से उन्हें हर वर्ष करीब डेढ़ लाख रुपये का शुद्ध लाभ होता है, जबकि नर्सरी से लगभग तीन लाख रुपये की अतिरिक्त आय हो जाती है। गांव के कई अन्य किसान भी इसी मॉडल को अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

Kisan News: जामुन की खेती

किसानों के अनुसार इस वर्ष जामुन की तुड़ाई 6 जून से शुरू हुई, जो 10 जुलाई तक चलेगी। वर्तमान में जामुन 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रहा है। हालांकि सीजन की शुरुआत में इसकी कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। रोजाना गांव से बड़ी मात्रा में जामुन दिल्ली की फल मंडियों में भेजे जा रहे हैं। किसान प्रेम सिंह का कहना है कि बारिश होने पर जामुन के फल एक साथ पक जाते हैं, जिससे कम समय में अधिक तुड़ाई करनी पड़ती है। वहीं किसान मंगल सिंह ने बताया कि एक पेड़ की तुड़ाई करीब चार दिन के अंतराल पर की जाती है और इस काम के लिए मजदूरों को 20 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से भुगतान किया जाता है।

उन्नत किस्मों से जल्दी मिलता है उत्पादन

कृषि विज्ञान केंद्र, बिचपुरी के उद्यान विशेषज्ञ अनुपम दुबे के अनुसार कलमी जामुन के पौधे तीन से चार वर्ष में फल देना शुरू कर देते हैं, जबकि थाईलैंड ब्लैक जैसी उन्नत किस्में दो से तीन वर्ष में ही उत्पादन देने लगती हैं। इसके विपरीत बीज से तैयार पौधों में फल आने में आठ से दस वर्ष का समय लग सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, व्यावसायिक स्तर पर जामुन की खेती के लिए राजा जामुन, सीआईएसएच जे-37, सीआईएसएच जे-42 और थाईलैंड ब्लैक जैसी किस्में अधिक उपयुक्त हैं। आगरा क्षेत्र में जुलाई और अगस्त का मानसून पौधरोपण के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।

पौधों की रोपाई 8×8 या 10×10 मीटर की दूरी पर करनी चाहिए। गड्ढों में पहले से गोबर की खाद, ट्राइकोडर्मा और आवश्यक उपचार मिलाने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है। शुरुआती वर्षों में पौधों को सहारा देना, जैविक खाद का उपयोग करना और सर्दियों में पाले से बचाव के लिए सिंचाई करना भी जरूरी माना जाता है।

Read More : Agra में DBRAU में मार्कशीट की गलतियों से छात्र परेशान, सुधार के लिए महीनों लगाने पड़ रहे चक्कर

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Will the middle class get relief from the first general budget of Modi 3.0?