Home » उत्तर प्रदेश » Funniest Names of Slap in UP: कानपुर में ‘कंटाप’ तो मेरठ में ‘रैप्टा’, इन शहरों में थप्पड़ के हैं बड़े मजेदार नाम

Funniest Names of Slap in UP: कानपुर में ‘कंटाप’ तो मेरठ में ‘रैप्टा’, इन शहरों में थप्पड़ के हैं बड़े मजेदार नाम

Funniest Names of Slap in UP : भारत में भाषा और बोलियों की विविधता इतनी ज्यादा है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों के नाम भी जगह बदलते ही बदल जाते हैं। उत्तर प्रदेश में थप्पड़ इसका मजेदार उदाहरण है। आमतौर पर इसे थप्पड़, चांटा या तमाचा कहा जाता है, लेकिन यूपी के अलग-अलग शहरों में इसके लिए ऐसे स्थानीय शब्द भी इस्तेमाल होते हैं, जिन्हें सुनकर हंसी आ सकती है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में थप्पड़ के लिए आमतौर पर ‘थप्पड़’ और ‘चांटा’ शब्द ही सुनने को मिलते हैं। लखनऊ की तहजीब और खास बोलचाल के बीच यह शब्द काफी सामान्य हैं। हालांकि शहर की स्थानीय भाषा में इनके इस्तेमाल का अंदाज परिस्थिति और बातचीत के हिसाब से बदल सकता है।

Funniest Names of Slap in UP

कानपुर पहुंचते ही थप्पड़ का नाम कुछ ज्यादा ही देसी और मजेदार हो जाता है। यहां इसे ‘कंटाप’ कहा जाता है। यह शब्द कानपुर की खास बोलचाल में काफी लोकप्रिय है। किसी को कंटाप पड़ने की बात सुनते ही कानपुरिया अंदाज और वहां की बेबाक भाषा याद आ जाती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में थप्पड़ के लिए ‘रैप्टा’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। स्थानीय बोलचाल में यह शब्द काफी जाना-पहचाना है। यही वजह है कि यूपी के अलग-अलग इलाकों के लोग जब इन स्थानीय शब्दों को सुनते हैं तो उन्हें काफी मजेदार और अनोखा अनुभव होता है।

थप्पड़ बन जाता है ‘पड़ाका’

बात अगर वाराणसी यानी काशी की हो तो यहां थप्पड़ को ‘पड़ाका’ कहने का चलन बताया जाता है। बनारस की अपनी अलग भाषा और ठेठ अंदाज है, इसलिए यहां इस्तेमाल होने वाला यह शब्द भी लोगों को खासा दिलचस्प लगता है। ‘पड़ाका’ सुनते ही कई लोगों को इसका अर्थ समझने में एक पल जरूर लग सकता है। संगमनगरी प्रयागराज में थप्पड़ के लिए ‘झापड़’ शब्द सुनने को मिलता है। हालांकि ‘झापड़’ शब्द यूपी के कई अन्य हिस्सों में भी समझा जाता है, लेकिन स्थानीय बातचीत में इसका इस्तेमाल अलग अंदाज में होता है। इस तरह एक ही चीज के लिए अलग-अलग शहरों में अलग नाम होना यूपी की भाषाई विविधता को दिखाता है।

बना दिया मजेदार

थप्पड़ के ये स्थानीय नाम सिर्फ हंसी-मजाक का विषय नहीं हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अलग-अलग बोलियों और क्षेत्रीय संस्कृति की झलक भी देते हैं। लखनऊ का चांटा, कानपुर का कंटाप, मेरठ का रैप्टा, वाराणसी का पड़ाका और प्रयागराज का झापड़ बताते हैं कि एक ही राज्य में रोजमर्रा की भाषा कितनी अलग-अलग रंगों में सुनाई देती है।

Read More : Lucknow-Kanpur Expressway पर शाम को भी दौड़ेंगी रोडवेज बसें, बढ़ती संख्या के बाद फैसला

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Will the middle class get relief from the first general budget of Modi 3.0?