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ITR भरना जल्दबाजी में पड़ सकता है भारी, 15 जून से पहले रिटर्न फाइल करने से खतरा!

ITR Filing 2026 : इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR भरने का सीजन शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोग अपने दस्तावेज तैयार करने लगते हैं। कई टैक्सपेयर्स जल्दी रिफंड पाने या काम निपटाने के लिए अप्रैल और मई में ही रिटर्न दाखिल कर देते हैं। हालांकि टैक्स एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इतनी जल्दी ITR फाइल करना कई बार नुकसानदायक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, 15 जून से पहले रिटर्न दाखिल करने पर आय और टैक्स कटौती से जुड़ी जानकारी अधूरी रह सकती है। ऐसे में बाद में डेटा मिसमैच होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे टैक्स विभाग की ओर से नोटिस आने या रिफंड अटकने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

ITR भरना जल्दबाजी में पड़ सकता है भारी

ITR फाइल करने के लिए फॉर्म 16, फॉर्म 26AS और AIS यानी Annual Information Statement बेहद जरूरी दस्तावेज माने जाते हैं। कंपनियों और बैंकों को कर्मचारियों व ग्राहकों से जुड़े TDS की जानकारी आयकर विभाग को भेजने के लिए 31 मई तक का समय दिया जाता है। इसके बाद विभागीय पोर्टल पर सभी जानकारियां अपडेट होने में कुछ दिन लगते हैं। आमतौर पर जून के मध्य तक पूरा डेटा सही तरीके से दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि टैक्स सलाहकार 15 जून के बाद ITR भरने की सलाह देते हैं, ताकि किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी से बचा जा सके।

फॉर्म 16 को ITR फाइलिंग का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसमें कर्मचारी की सैलरी, टैक्स छूट, निवेश, कटौतियां और काटे गए TDS का पूरा रिकॉर्ड होता है। अगर यह जानकारी पूरी तरह अपडेट होने से पहले रिटर्न भर दिया जाए, तो कई बार आय और टैक्स विवरण में अंतर आ जाता है।

गलत जानकारी देने पर आ सकता है नोटिस

इसी तरह AIS और फॉर्म 26AS में बैंक ब्याज, शेयर बाजार से कमाई, फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य आय स्रोतों की जानकारी दर्ज होती है। यदि इन दस्तावेजों का डेटा अधूरा हो, तो बाद में संशोधन करना पड़ सकता है या विभाग रिटर्न को जांच के लिए रोक सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी में ITR भरते समय लोग कई बार अधूरी या गलत जानकारी दर्ज कर देते हैं। बाद में जब बैंक या कंपनी का अपडेटेड डेटा पोर्टल पर आता है, तो विभाग के रिकॉर्ड और टैक्सपेयर द्वारा दी गई जानकारी में अंतर दिखाई देता है।

ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है। कई मामलों में टैक्स रिफंड भी लंबी जांच के कारण अटक जाता है। इसलिए सही और पूरी जानकारी आने तक इंतजार करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

ज्यादा सावधानी जरूरी

जिन लोगों की कमाई सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं है, उन्हें ITR भरते समय अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, बैंक ब्याज, किराया या बिजनेस से आय पाने वालों का डेटा कई बार देर से अपडेट होता है। कुछ बैंक और वित्तीय संस्थान बाद में संशोधित रिपोर्ट भी अपलोड करते हैं। ऐसे में यदि टैक्सपेयर पहले ही रिटर्न दाखिल कर चुका हो, तो उसे संशोधित ITR भरनी पड़ सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरा डेटा अपडेट होने के बाद ही रिटर्न फाइल करें, ताकि रिफंड समय पर मिले और किसी तरह की कानूनी या तकनीकी परेशानी से बचा जा सके।

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