Business Tips : भारत में ज्यादातर युवाओं की पहली नौकरी 20 से 25 हजार रुपये महीने की सैलरी से शुरू होती है। ऐसे में अक्सर लोगों को लगता है कि इतनी कम कमाई में सिर्फ खर्च पूरे हो सकते हैं, भविष्य बनाना मुश्किल है। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों की मानें तो करोड़पति बनने के लिए बड़ी सैलरी नहीं, बल्कि सही निवेश और अनुशासन जरूरी होता है। अगर कोई व्यक्ति समय रहते निवेश शुरू कर दे और लगातार बचत करता रहे, तो छोटी रकम भी आने वाले वर्षों में बड़ा फंड तैयार कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूचुअल फंड SIP आज के समय में सबसे आसान और असरदार निवेश विकल्पों में शामिल है। यदि कोई व्यक्ति हर महीने 5 हजार रुपये SIP में निवेश करता है और उसे औसतन 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो करीब 25 साल में उसके पास डेढ़ करोड़ रुपये तक का फंड तैयार हो सकता है। यही कंपाउंडिंग की ताकत है, जहां पैसा खुद पैसा बनाना शुरू कर देता है।
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फाइनेंशियल प्लानर्स आजकल 5-15-25 रूल को काफी प्रभावी मान रहे हैं। इसका मतलब है हर महीने 5 हजार रुपये निवेश, 15 प्रतिशत संभावित रिटर्न और 25 साल का धैर्य। इस फॉर्मूले को अपनाने वाले लोग लंबे समय में मजबूत संपत्ति बना सकते हैं। खास बात यह है कि इसमें बड़ी कमाई की जरूरत नहीं होती, बल्कि लगातार निवेश सबसे अहम होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जैसे-जैसे सैलरी बढ़े, वैसे-वैसे निवेश भी बढ़ाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति हर साल अपनी SIP में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करता है, तो करोड़पति बनने का लक्ष्य और जल्दी हासिल किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर 5 हजार रुपये से शुरू हुई SIP कुछ सालों में 10-15 हजार तक पहुंच सकती है, जिससे रिटर्न भी कई गुना बढ़ जाता है।
50:30:20 नियम से संभालें अपना बजट
कम सैलरी में बचत करने के लिए खर्चों पर नियंत्रण जरूरी माना जाता है। इसके लिए 50:30:20 नियम काफी लोकप्रिय है। इसमें सैलरी का 50 प्रतिशत जरूरी जरूरतों पर, 30 प्रतिशत व्यक्तिगत खर्चों पर और 20 प्रतिशत बचत व निवेश में लगाने की सलाह दी जाती है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर शुरुआत से यह आदत बना ली जाए तो भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित हो सकता है।
निवेश से पहले ये तैयारी बेहद जरूरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेश शुरू करने से पहले कुछ जरूरी कदम उठाना भी जरूरी है। सबसे पहले कम-से-कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए। इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस भी जरूरी माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति पर क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन का भारी कर्ज है, तो पहले उसे खत्म करना बेहतर माना जाता है। कम उम्र में निवेश शुरू करने वालों को कंपाउंडिंग का सबसे ज्यादा फायदा मिलता है। 20-22 साल की उम्र में शुरू किया गया छोटा निवेश भी 45-50 साल तक बड़ी संपत्ति में बदल सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ युवाओं को नौकरी लगते ही निवेश शुरू करने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि करोड़पति बनने का रास्ता बड़ी सैलरी से नहीं, बल्कि छोटी उम्र से शुरू हुई सही आदतों से होकर गुजरता है।




