UP Politics : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी जमीन तैयार हो रही है और इसी के साथ दलित-पिछड़े वोटों को लेकर राजनीतिक दलों की जोर आजमाइश भी तेज होती जा रही है। गोंडा के कारोबारी विनोद साहनी की हत्या ने पहले ही सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक सियासी हलचल बढ़ा रखी है। अब आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के एक दावे ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। चंद्रशेखर ने दावा किया है कि एक फार्महाउस में उनकी हत्या की साजिश तैयार की गई। उन्होंने इसके पीछे आरक्षण विरोधी आंदोलन से जुड़े लोगों की भूमिका होने का आरोप लगाया है और सरकार से उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हालांकि, इस कथित साजिश की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले विनोद साहनी के परिवार से मिलने गोंडा जाते समय चंद्रशेखर को बाराबंकी में पुलिस ने रोक दिया था, जहां उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी थी।
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चंद्रशेखर आजाद ने पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी वीडियो में कहा कि उन्हें कुछ साथियों के जरिए कथित साजिश की जानकारी मिली है। उनका दावा है कि एक फार्महाउस में उन्हें मारने की योजना बनाई गई। उन्होंने कहा कि उनके पास पहुंची सूचना और उसके स्रोत को वह गंभीर मानते हैं। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर ऐसा कोई प्रमाण पेश नहीं किया है जिससे आरोप की स्वतंत्र पुष्टि हो सके। आजाद ने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच के बाद ही सच और झूठ सामने आ जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि आरक्षण और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाने की कोशिश हो रही है। उनका कहना है कि राजनीतिक तरीके से रोकने में नाकाम रहने के बाद उनके खिलाफ कथित तौर पर दूसरी रणनीति अपनाई जा रही है।
गोंडा हत्याकांड से चढ़ा सियासी पारा
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में गोंडा के कारोबारी विनोद साहनी की हत्या भी है। साहनी की मौत के बाद मामला राजनीतिक रूप से काफी गरमा गया है। निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद समेत कई नेताओं ने कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ लापरवाही के आरोप में पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की है। विनोद साहनी के परिजनों से मिलने जा रहे चंद्रशेखर आजाद को 13 सितंबर को बाराबंकी में पुलिस ने रोक दिया था। पुलिस के मुताबिक सुरक्षा कारणों से काफिला रोका गया था। इसके बाद समर्थकों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बनी। बाद में चंद्रशेखर के काफिले पर कथित पथराव की खबरें भी सामने आईं और कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचा।
एक फार्म हाउस में मेरी हत्या करने का षड्यंत्र रचा गया है। मैं यह बात बहुत जिम्मेदारी से कह रहा हूं। मेरे पास जो सूचनाएं और स्रोत हैं, वे गलत नहीं हैं। मैं सरकार से मांग करता हूं कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए और हत्या की साजिश से लेकर बाराबंकी हिंसा में… pic.twitter.com/sNpzUo97Ul
— Aazad Samaj Party – Kanshi Ram (@AzadSamajParty) September 15, 2026
गाड़ियों में आग लगाने की कोशिश!
चंद्रशेखर ने अपने वीडियो में बाराबंकी की घटना को लेकर और गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों के पास बोतलों में ज्वलनशील पदार्थ जैसी चीजें थीं और गाड़ियों को आग लगाने की कोशिश की गई। उन्होंने इस घटनाक्रम को अपनी सुरक्षा से जोड़ते हुए जांच की मांग की है। इन आरोपों की आधिकारिक जांच से पुष्टि होना अभी बाकी है। नगीना सांसद ने कहा कि वह कथित धमकियों के कारण अपनी राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई बंद नहीं करेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से भी डरने के बजाय संघर्ष जारी रखने की बात कही। आजाद ने दावा किया कि बिहार से उत्तर प्रदेश तक दलितों, पिछड़ों और दूसरे वंचित वर्गों से जुड़े मामलों में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है।
नई सियासी जंग
चंद्रशेखर के आरोप ऐसे वक्त सामने आए हैं जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय और सामाजिक समीकरणों पर राजनीतिक खींचतान तेज हो रही है। विनोद साहनी हत्याकांड पहले ही निषाद और पिछड़े वर्ग की राजनीति के केंद्र में आ चुका है। अब एक मौजूदा सांसद की ओर से अपनी हत्या की साजिश का दावा किए जाने के बाद उनकी सुरक्षा और मामले की जांच को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल, सबसे अहम सवाल यही है कि जांच में चंद्रशेखर के दावों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
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