Hariali Teej 2026 : मथुरा के वृंदावन में हरियाली तीज के पावन पर्व पर शनिवार को ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज ने अपने ऐतिहासिक स्वर्ण-रजत हिंडोले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। साल में केवल एक बार होने वाले इस विशेष झूला दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे। सुबह से ही मंदिर और आसपास की गलियों में भक्तों की भारी भीड़ नजर आई।
हरियाली तीज के मौके पर ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार किया गया। दिल्ली से मंगाई गई हरे रंग की बेशकीमती जड़ाऊ पोशाक के साथ उन्हें रत्नजड़ित स्वर्णाभूषण पहनाए गए। मंदिर परिसर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में युवा और जेनजी भी ठाकुरजी के झूला दर्शन के लिए पहुंचे।
Hariali Teej 2026
इस वर्ष ठाकुर बांकेबिहारीजी महाराज 80वीं बार इसी विशेष हिंडोले पर विराजमान हुए। करीब 79 वर्ष पुराने इस हिंडोले का निर्माण बनारस के कारीगरों ने वर्ष 1942 से 1947 के बीच लगभग पांच साल में किया था। वर्ष 1947 में पहली बार हरियाली तीज पर ठाकुरजी ने इस हिंडोले पर झूला विहार किया था। करीब पांच टन वजनी यह विशाल हिंडोला लगभग 180 हिस्सों में तैयार किया गया है। इसमें नाचते मयूर, घुमावदार सीढ़ियां, आकर्षक खंभे और ललिता, विशाखा, चित्रलेखा व रंगदेवी सखियों की आदमकद आकृतियां बनाई गई हैं। बारीक बेल-बूटों की नक्काशी इसकी सुंदरता को और बढ़ाती है। हिंडोले में करीब 10 हजार तोले सोना और एक लाख तोले चांदी का इस्तेमाल किया गया है।
हिंडोले का नवीनीकरण
करीब 25 साल बाद इस ऐतिहासिक हिंडोले का नवीनीकरण कराया गया। जयपुर के 28 कारीगरों ने 22 दिनों तक विशेष सुरक्षा के बीच इसकी सफाई, मरम्मत, सोने की जड़ाई और पॉलिश का काम किया। नवीनीकरण में करीब एक किलो सोने का इस्तेमाल हुआ और इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए। सुरक्षा के लिए काम सीसीटीवी निगरानी और पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। झूला विहार के बाद ठाकुरजी के विश्राम के लिए सुखसेज भी सजाई गई।
REad More : Agra University: 20 से 22 अगस्त तक होगी पीएचडी की काउंसलिंग, 2050 सफल अभ्यर्थियों को बुलाया




