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Varanasi में लापरवाही पर सख्त हुए पुलिस कमिश्नर, 2 विवेचक निलंबित; 4 दरोगा लाइन हाजिर

Varanasi News : वाराणसी में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार रात आयोजित समीक्षा बैठक में साइबर अपराध सेल और विभिन्न थानों के हेल्प डेस्क प्रभारियों के कार्यों की गहन समीक्षा की गई। जांच के दौरान कई मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने और विवेचनाएं लंबित पाए जाने पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कुछ साइबर अपराध मामलों की विवेचनाएं 60 दिनों से अधिक समय से लंबित थीं। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सिंधोरा थाने के विवेचक रोहित कुमार और लोहता थाने के विवेचक ऋतुराज मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की संस्तुति भी की गई है।

Varanasi में सख्त हुए पुलिस कमिश्नर

पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध जैसे संवेदनशील मामलों में किसी भी स्तर की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में काशी, वरुणा और गोमती जोन के थानों की कार्यप्रणाली का भी मूल्यांकन किया गया। साइबर अपराध संबंधी मामलों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर चार सब इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई। कोतवाली थाने के विजय कुमार यादव, आदमपुर थाने के सौरभ कुमार, शिवपुर थाने के पवन जायसवाल और जंसा थाने के तबीज खान को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से पुलिस कर्मियों में जवाबदेही बढ़ेगी।

अकाउंट्स पर रहेगा फोकस

समीक्षा बैठक में साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल अकाउंट्स, प्रतिबंधित बैंक खातों और संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पुलिस कमिश्नर ने फर्जी पीओएस मशीनों और डिजिटल माध्यमों से होने वाले वित्तीय अपराधों पर विशेष निगरानी रखने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस ने इस वर्ष साइबर ठगी के मामलों में उल्लेखनीय कार्रवाई भी की है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार 1 जनवरी से 20 जून 2026 तक साइबर फ्रॉड से संबंधित करीब छह करोड़ रुपये की धनराशि को फ्रीज या होल्ड कराया गया है। इससे कई पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद बनी है और अपराधियों की आर्थिक गतिविधियों पर भी रोक लगी है।

डिवाइस किए गए निष्क्रिय

साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए तकनीकी स्तर पर भी कार्रवाई तेज की गई है। वर्ष 2026 में 25 जून तक कुल 3198 मोबाइल नंबर बंद कराए गए हैं, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों में किया जा रहा था। इसके अलावा 509 मोबाइल फोन के IMEI नंबर निष्क्रिय किए गए हैं, ताकि भविष्य में उनका उपयोग साइबर अपराधों में दोबारा न हो सके। पुलिस का कहना है कि डिजिटल अपराधों के खिलाफ अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

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