Noida News : नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जिले में पहले से संचालित 100 इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े में जल्द ही 110 नई ई-बसें शामिल होने जा रही हैं। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर जिले में कुल 210 इलेक्ट्रिक बसें विभिन्न रूटों पर दौड़ेंगी। इस पहल का उद्देश्य बढ़ती आबादी और यातायात दबाव के बीच लोगों को सुरक्षित, सुलभ और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। वर्तमान में नोएडा प्राधिकरण की देखरेख में 100 ई-बसों का संचालन सेक्टर-90 स्थित एनएमआरसी डिपो से किया जा रहा है।
नगर विकास विभाग द्वारा स्वीकृत 110 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सेक्टर-82 स्थित सिटी बस टर्मिनल से किया जाएगा। दोनों परियोजनाओं के एक साथ शुरू होने के बाद जिले के अधिकांश प्रमुख मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों की उपलब्धता बढ़ जाएगी, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
Noida में पब्लिक ट्रांसपोर्ट होगा मजबूत
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार नगर विकास विभाग ने नई बसों के संचालन के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने को लेकर संपर्क किया था। इसके बाद सेक्टर-82 स्थित बस टर्मिनल को संचालन केंद्र के रूप में प्रस्तावित किया गया। विभाग ने बसों की खरीद प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ महीनों में ये बसें सड़कों पर उतर जाएंगी और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
नई ई-बसों के रूट अभी अंतिम रूप से तय नहीं किए गए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) यात्रियों की जरूरत और यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए मार्ग निर्धारित करेगा। प्रस्तावित योजना के तहत इन बसों को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने के साथ-साथ जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक भी चलाने की तैयारी है। इससे दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
ट्रैफिक दबाव होगा कम
सभी नई बसें 12 मीटर लंबी वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें होंगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और ईंधन पर होने वाला खर्च भी घटेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 210 ई-बसों का संयुक्त नेटवर्क शुरू होने के बाद जिले में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। इससे ट्रैफिक जाम कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और लोगों को किफायती यात्रा विकल्प उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यह परियोजना शहरी परिवहन व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।
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