Simulator Training : भारतीय सशस्त्र बलों में सिमुलेटर आधारित प्रशिक्षण को बड़े पैमाने पर अपनाने से रक्षा क्षेत्र में हर साल 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती है। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट यानी The Energy and Resources Institute (टेरी) द्वारा जारी एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार आधुनिक सिमुलेटर तकनीक के इस्तेमाल से ईंधन की खपत घटेगी, गोला-बारूद का उपयोग कम होगा और लॉजिस्टिक खर्च में भी बड़ी कमी आएगी।
टेरी ने अपनी रिपोर्ट में प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस हालिया आह्वान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने देशवासियों से ईंधन बचाने और अनावश्यक खर्च कम करने की अपील की थी।
Simulator Training से सेना को बड़ा फायदा
प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल कीमतों और आयात बिलों को देखते हुए सामूहिक मितव्ययिता अपनाने पर जोर दिया था। रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा समय में देश के लिए हर लीटर ईंधन और हर विदेशी संसाधन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में रक्षा क्षेत्र में तकनीक आधारित प्रशिक्षण आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकता है। टेरी के अध्ययन में सेना के विभिन्न हिस्सों में इस्तेमाल होने वाले 13 सिमुलेटर सिस्टम का विश्लेषण किया गया। इसमें इन्फैंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, आर्मर्ड कॉर्प्स और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार पारंपरिक प्रशिक्षण अभ्यासों में भारी मात्रा में ईंधन, सैन्य उपकरण और गोला-बारूद खर्च होता है। वहीं सिमुलेटर आधारित प्रशिक्षण में वास्तविक परिस्थितियों जैसी ट्रेनिंग कम लागत में दी जा सकती है।
युद्ध तैयारी के साथ पर्यावरण संरक्षण भी
टेरी के वरिष्ठ फेलो और निदेशक Souvik Bhattacharyya ने कहा कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार आधुनिक रक्षा तकनीक न केवल सेना की तैयारी को मजबूत बनाती है, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी मदद करती है। उन्होंने कहा कि सिमुलेटर तकनीक से कार्बन उत्सर्जन घटाने और पर्यावरणीय दबाव कम करने में भी सहायता मिल सकती है। इससे रक्षा क्षेत्र में स्थिरता के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का रास्ता मजबूत होगा।
विदेशी मुद्रा बचाने में मिलेगी मदद
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा प्रशिक्षण में ईंधन की खपत कम होने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, ऐसे में खपत में कमी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सिमुलेटर आधारित प्रशिक्षण को बड़े स्तर पर लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र की लागत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के कई विकसित देश पहले से ही उन्नत सिमुलेटर तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। भारत भी अब तेजी से तकनीक आधारित सैन्य प्रशिक्षण मॉडल की ओर बढ़ रहा है। इससे सैनिकों को सुरक्षित वातावरण में बेहतर अभ्यास का अवसर मिलेगा और साथ ही रक्षा बजट पर दबाव भी कम होगा।
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