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8th Pay Commission पर बढ़ी हलचल, सैलरी ₹72,000 तक करने की मांग; भत्तों में भी बड़े बदलाव की तैयारी

8th Pay Commission
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8th Pay Commission : आठवें वेतन आयोग को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार के सामने वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में बड़े बदलाव की मांग रखते हुए अपने प्रस्ताव सौंप दिए हैं। माना जा रहा है कि अगर इन मांगों पर अमल होता है, तो यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा वेतन संशोधन साबित हो सकता है। लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब इस आयोग के फैसलों पर टिकी है।

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वेतन बढ़ोतरी को लेकर अलग-अलग संगठनों ने अलग सुझाव दिए हैं। Progressive Teachers Justice Forum ने लेवल-1 कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़ाकर ₹50,000 से ₹60,000 करने की मांग की है।

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वहीं, Bharatiya Pratiraksha Mazdoor Sangh ने इससे भी आगे जाकर न्यूनतम वेतन ₹72,000 तक करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही ऊंचे पदों के लिए अधिकतम वेतन ₹10 लाख तक करने की बात भी सामने आई है। वेतन तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। फिलहाल यह 2.57 है, लेकिन PSNM ने इसे 2.62 से 3.83 के बीच करने का सुझाव दिया है। वहीं BPMS इसे सीधे 4 तक ले जाना चाहता है। इसके अलावा सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 6 से 7% करने की मांग की गई है, ताकि बढ़ती महंगाई का असर कर्मचारियों पर कम पड़े।

भत्तों में भी बड़े बदलाव की मांग

संगठनों ने सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि भत्तों में भी बदलाव की बात रखी है। HRA को बढ़ाकर 12%, 24% और 36% करने का प्रस्ताव दिया गया है। ट्रांसपोर्ट अलाउंस को कम से कम ₹9,000 करने और उसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग की गई है। बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाले भत्ते को ₹2,800 से बढ़ाकर ₹7,000 करने और डिजिटल जरूरतों के लिए ₹2,000 प्रति माह का नया अलाउंस देने की भी मांग सामने आई है। कर्मचारियों ने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग भी दोहराई है। इसके अलावा रिटायरमेंट पर मिलने वाले फायदों में बढ़ोतरी की बात कही गई है। अर्जित अवकाश के नकद भुगतान की सीमा 300 से बढ़ाकर 400 दिन करने और ग्रेच्युटी की सीमा ₹50 लाख तक करने का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही प्रमोशन सिस्टम को भी बेहतर बनाने की मांग की गई है।

आर्थिक तर्क भी पेश किए गए

इन मांगों को सही ठहराने के लिए संगठनों ने आर्थिक आंकड़ों का भी सहारा लिया है। Ministry of Statistics and Programme Implementation के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 से 2024-25 के बीच देश की प्रति व्यक्ति आय में करीब 86% की बढ़ोतरी हुई है। इसी आधार पर संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों की सैलरी भी उसी अनुपात में बढ़नी चाहिए। साथ ही परिवार की वास्तविक जरूरतों को देखते हुए वेतन गणना में परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। अगर इन मांगों को लागू किया जाता है, तो सरकार के खर्च में बड़ा इजाफा होगा। वेतन और पेंशन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ सकता है, जिससे बजट पर दबाव पड़ेगा। हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सम्मानजनक जीवन स्तर देना सरकार की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि वेतन आयोग कर्मचारियों की उम्मीदों और सरकार की आर्थिक स्थिति के बीच कैसे संतुलन बनाता है।

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