Strait of Hormuz : पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। Strait of Hormuz में अमेरिका और Iran के बीच टकराव खतरनाक मोड़ ले चुका है। हाल के दिनों में जहाजों की जब्ती और फायरिंग की घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि युद्धविराम के बावजूद समुद्र में ‘छाया युद्ध’ जारी है। इस स्थिति ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तनाव 28 फरवरी के बाद तेजी से बढ़ा, जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गई। इसके जवाब में तेहरान ने होर्मुज मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी।
Strait of Hormuz
4 मार्च को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ कहा कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को उसकी अनुमति लेनी होगी। स्थिति 13 अप्रैल के बाद और बिगड़ गई, जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी। इसके बाद दोनों देशों के बीच ‘जैसे को तैसा’ की रणनीति देखने को मिली। अमेरिका ने एक ईरानी पोत को जब्त किया, जबकि ईरान ने इसे समुद्री डकैती बताया। इसके जवाब में ईरान ने भी विदेशी जहाजों को रोकना और कब्जे में लेना शुरू कर दिया।
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरान के पहले उप राष्ट्रपति Mohammad Reza Aref ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा मुफ्त में नहीं मिल सकती। उनका कहना है कि अगर ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगाई जाएगी, तो बाकी देशों को भी इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक बाजार की स्थिरता ईरान पर दबाव खत्म होने पर ही संभव है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। शांति के समय यहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और एलएनजी सप्लाई गुजरती है। मौजूदा हालात में स्थिति यह है कि इस रास्ते के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग पक्ष नजर रख रहे हैं, जिससे जोखिम और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि यह सीधा युद्ध नहीं बल्कि दबाव बनाने की रणनीति है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विशेषज्ञ Ali Vaez के मुताबिक, यह बेहद संवेदनशील स्थिति है, जहां छोटी सी घटना भी बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है। दोनों देश एक-दूसरे को जवाब देने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना मुश्किल है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में यह तनाव और बढ़ सकता है।
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