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Mysterious Lake, जहां पानी के संपर्क में आते ही पत्थर बन जाते हैं जीव; जानें इसका वैज्ञानिक सच

Mysterious Lake
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Mysterious Lake : प्रकृति अपने भीतर कई ऐसे रहस्य समेटे हुए है, जिन्हें जानकर हैरानी होती है। ऐसी ही एक जगह है नेट्रॉन झील, जो तंजानिया के उत्तरी हिस्से में, केन्या की सीमा के पास स्थित है। इस झील की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके संपर्क में आने वाले कई जीव-जंतु मरने के बाद पत्थर जैसे नजर आने लगते हैं। यह दावा सुनने में भले ही डरावना लगे, लेकिन इसके पीछे एक ठोस वैज्ञानिक कारण छिपा हुआ है।

यह झील न्गोरोंगोरो क्रेटर के उत्तर-पूर्व में फैली हुई है और करीब 56 किलोमीटर लंबी व 22 किलोमीटर चौड़ी है। इस झील को पानी आसपास की नदियों और गर्म झरनों से मिलता है, लेकिन इसकी खासियत इसके पास स्थित सक्रिय ज्वालामुखी ओल्डोइन्यो लेंगाई से जुड़ी हुई है।

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यही ज्वालामुखी झील के पानी में ऐसे खनिज मिलाता है, जो इसे बेहद खतरनाक बना देते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस ज्वालामुखी से निकलने वाले सोडियम और कैल्शियम कार्बोनेट जैसे तत्व जमीन के अंदर से होते हुए झील में पहुंचते हैं। झील का पानी कहीं बाहर नहीं बहता, जिससे इसमें खनिज लगातार जमा होते रहते हैं। तेज धूप और वाष्पीकरण के कारण पानी सूखता है और पीछे अत्यधिक क्षारीय तत्व बच जाते हैं। यही वजह है कि इस झील का pH स्तर 10.5 से 12 तक पहुंच जाता है, जो बहुत ज्यादा क्षारीय होता है। ऐसे पानी के संपर्क में आने से त्वचा और आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

कैसे बन जाते हैं जीव पत्थर

सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जिनमें पक्षी या चमगादड़ पत्थर की मूर्तियों जैसे दिखाई देते हैं। दरअसल, झील में मौजूद सोडियम कार्बोनेट एक तरह का प्राकृतिक संरक्षक (प्रिजर्वेटिव) होता है। यही तत्व प्राचीन समय में शवों को सुरक्षित रखने यानी ममी बनाने में इस्तेमाल किया जाता था। जब कोई जीव इस पानी के संपर्क में आता है, तो उसका शरीर धीरे-धीरे सूख जाता है, बैक्टीरिया पनप नहीं पाते और उस पर खनिजों की परत जम जाती है। इस प्रक्रिया के बाद वह जीव पत्थर जैसा सख्त दिखने लगता है।

यह प्रक्रिया नहीं होती तुरंत

अक्सर यह गलतफहमी होती है कि झील को छूते ही जीव तुरंत पत्थर बन जाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि यह एक धीमी प्रक्रिया है। समय के साथ शरीर की नमी खत्म होती है और वह ममी की तरह संरक्षित हो जाता है। यानी यह एक प्राकृतिक केमिकल रिएक्शन है, कोई जादू नहीं। इतनी कठोर परिस्थितियों के बावजूद यह झील पूरी तरह निर्जीव नहीं है। यहां का पानी कई बार लाल या गुलाबी दिखाई देता है, जिसका कारण सूक्ष्म जीव होते हैं। खास बात यह है कि लेसर फ्लेमिंगो इस झील को अपना प्रजनन स्थल बनाते हैं। उनकी टांगों पर मौजूद खास परत उन्हें इस पानी से बचाती है। इसके अलावा कुछ मछलियां भी इस वातावरण के अनुसार खुद को ढाल चुकी हैं।

प्रकृति जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यमयी और खतरनाक भी हो सकती है। यहां का नजारा जहां एक तरफ डर पैदा करता है, वहीं दूसरी तरफ यह दिखाता है कि जीवन हर मुश्किल परिस्थिति में भी अपना रास्ता खोज लेता है।

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