Chaitra Navratri 2026:- चैत्र नवरात्र के दौरान छठे दिन मां कात्यायनी को पूजा जाता है। चैत्र नवरात्र का छठवां दिन मां कात्यायनी को समर्पित किया गया है इस दिन मां कात्यायनी की पूजा पाठ की जाती है और मान्यता है कि अगर आप मां कात्यायनी को प्रसन्न करते हैं तो जीवन में आपको शत्रु का भय नहीं रहता साथ ही आपके जीवन में आ रही सभी हमेशा के लिए दूर हो जाती है। अगर आत्मा का अध्याय की पूजा पाठ पूरे मन और श्रद्धा से करते हैं तो उनकी कृपा बरसाना किसी चमत्कार से कम नहीं होती है।
कैसे करें मां कात्यायनी को प्रसन्न
मां कात्यायनी को प्रसन्न करना बहुत ही आसान है। अगर आप चैत्र नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा आराधना करते हैं और पूरे मन से उनको याद करते हैं तो जीवन में आपको कई समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा। मान्यता है कि इस दिन अगर आप इस दिव्य मंत्र का जाप करते हैं तो आपके जीवन में आने वाले सभी संघर्ष काम हो जाते हैं और विवाह में आ रही अड़चनें हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। माता कात्यायनी को प्रसन्न करने से आपका जीवन बदल जाता है।
देवी कात्यायनी मंत्र
चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।। या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। ध्यान वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्त्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना प†वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥ स्तोत्र पाठ- कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
मां कात्यायनी कवच
कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥
Read More:- बारिश-ओलावृष्टि के बाद फिर बढ़ी मध्यप्रदेश में गर्मी, अप्रैल और मई के महीने में लू चलने के आसार




