Union Budget 2026 : 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में अक्सर ‘घाटे का बजट’ शब्द सुना जाता है। घाटे का बजट तब होता है जब सरकार की कुल आय उसके कुल खर्च से कम हो। सरल शब्दों में, सरकार जितना खर्च करना चाहती है, उतना राजस्व टैक्स, शुल्क और अन्य स्रोतों से प्राप्त नहीं होता। यह स्थिति तब आती है जब सरकार को विकास योजनाओं, जनकल्याण कार्यक्रमों, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य या आपदा प्रबंधन पर अधिक खर्च करना पड़ता है। घाटे का बजट न पूरी तरह अच्छा होता है और न ही पूरी तरह बुरा; इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि घाटा क्यों और किस उद्देश्य से किया गया।
घाटे का बजट बनने के कई कारण हो सकते हैं। आर्थिक मंदी के समय टैक्स संग्रह कम हो जाता है, जबकि बेरोजगारी भत्ते और राहत योजनाओं पर खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में असावधानी से लिया गया घाटा भविष्य में वित्तीय चुनौतियों को जन्म दे सकता है।
Union Budget 2026
बढ़ती जनसंख्या, महंगाई, सब्सिडी का बोझ, चुनावी वादे और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतें भी खर्च बढ़ाती हैं। कई बार सरकार जान-बूझकर घाटे का बजट लाती है ताकि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़े और विकास को गति मिले। जब सरकार घाटे का बजट पेश करती है, तो उसे अतिरिक्त फंड जुटाने की जरूरत होती है। सबसे आम तरीका है उधार लेना। सरकार आंतरिक स्रोतों से जैसे बैंकों, वित्तीय संस्थानों और जनता से बांड या सरकारी प्रतिभूतियां जारी कर फंड जुटाती है। इसके अलावा विदेशी कर्ज लेना, केंद्रीय बैंक से सहायता लेना या सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बेचकर भी धन जुटाया जा सकता है। हालांकि, इन उपायों के साथ मुद्रास्फीति और कर्ज के जोखिम को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।
घाटे का बजट
घाटे का बजट अपने साथ लाभ और हानि दोनों ला सकता है। यदि उधार लिया गया फंड शिक्षा, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे उत्पादक क्षेत्रों में निवेश किया जाए, तो भविष्य में आय बढ़ सकती है और घाटा संभालना आसान होता है। यदि यह फंड अनुत्पादक खर्चों में चला जाए, तो कर्ज का बोझ बढ़ता है और आर्थिक स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है इसलिए सरकार के लिए संतुलन, पारदर्शिता और दीर्घकालिक सोच के साथ घाटे का बजट बनाना बेहद जरूरी है।
Read More : Union Budget: साल 2026 का आम बजट 1 फरवरी को होगा पेश, पढ़ें पूरी जानकारी





