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Ayodhya में रामलला को अर्पित हुआ दुनिया का सबसे महंगा आम, किसान की मेहनत बनी चर्चा का विषय

Ayodhya News : अयोध्या में इस बार एक साधारण फल ने असाधारण पहचान बना ली है। यहां रामलला को अर्पित किए गए भोग में जिस आम ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वह कोई आम फल नहीं बल्कि दुनिया के सबसे दुर्लभ और महंगे माने जाने वाले मियाजाकी आम थे। जापान से आने वाली इस खास किस्म को “सूरज का अंडा” भी कहा जाता है, क्योंकि इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी आभा लिए होता है, जो इसे अन्य आमों से अलग पहचान देता है। अयोध्या के एक स्थानीय किसान ने मेहनत और लगातार देखभाल के बाद इस विदेशी किस्म को अपने बाग में सफलतापूर्वक उगाया है।

इस साल पहली बार पेड़ पर फल आने के बाद किसान ने इन्हें बेचने की बजाय धार्मिक भावना से रामलला को अर्पित करने का निर्णय लिया। मंदिर में जब यह आम भोग के रूप में रखा गया, तो श्रद्धालुओं के बीच यह आस्था और उत्सुकता दोनों का केंद्र बन गया। इस अनोखे फल ने न केवल धार्मिक महत्व को बढ़ाया बल्कि स्थानीय कृषि नवाचार की भी मिसाल पेश की है।

Ayodhya में रामलला

अयोध्या स्थित Ram Mandir Ayodhya में विराजमान रामलला को इस बार विशेष भोग अर्पित किया गया। इस भोग में जापान की दुर्लभ मियाजाकी आम किस्म शामिल रही, जिसने पूरे कार्यक्रम को खास बना दिया। मंदिर में इस भोग को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अर्पित किया गया और इसे श्रद्धा के साथ प्रस्तुत किया गया। मियाजाकी आम अपनी बनावट, रंग और स्वाद के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे “एग ऑफ द सन” कहा जाता है क्योंकि इसका रंग गहरे लाल-बैंगनी शेड में होता है। यह आम बहुत कम मात्रा में उगता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जिससे यह दुनिया के सबसे महंगे फलों में शामिल है।

किसान की मेहनत ने रचा इतिहास

अयोध्या के किसान ओमप्रकाश सिंह ने लगभग दो वर्ष पहले इस जापानी आम का पौधा लगाया था। लगातार मेहनत और सही देखभाल के बाद इस वर्ष पहली बार पेड़ पर लगभग 12 फल आए। हर फल का वजन 150 से 300 ग्राम के बीच बताया गया है। किसान की यह कोशिश अब स्थानीय कृषि के लिए एक प्रेरणा बन गई है। जानकारी के अनुसार, मियाजाकी आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग ढाई से तीन लाख रुपये प्रति किलो तक बिकता है। एक फल की कीमत भी लगभग एक लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इस वजह से यह किस्म आम नहीं बल्कि लग्जरी फल की श्रेणी में मानी जाती है और इसकी मांग सीमित लेकिन बहुत ऊंचे स्तर पर रहती है।

भोग का धार्मिक महत्व

किसान ने बताया कि जब पेड़ पर पहला फल तैयार हुआ, तो उन्होंने उसे बाजार में बेचने के बजाय धार्मिक आस्था के तहत भगवान रामलला को अर्पित करने का निर्णय लिया। मंदिर में भोग के दौरान आम के ऊपर तुलसी पत्र भी रखा गया, जिसे शुभ परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इस पहल ने धार्मिक भावनाओं और कृषि नवाचार को एक साथ जोड़ दिया। यह घटना सिर्फ एक फल के भोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने अयोध्या की आस्था, किसान की मेहनत और विदेशी कृषि तकनीक के सफल प्रयोग को एक साथ प्रस्तुत किया है। रामलला को अर्पित यह दुर्लभ आम अब श्रद्धा और चर्चा दोनों का विषय बन गया है।

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