Allahabad : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) 2025 प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने आयोग के अधिवक्ता से आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने को कहा था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह जानना चाहा था कि क्या याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान आयु सीमा में किसी प्रकार की छूट या अन्य लाभ प्राप्त किया था। इस पर आयोग के वकील को स्पष्ट निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को सूचित करने के लिए समय दिया गया था। अदालत ने मामले को आगे बढ़ाते हुए अगली सुनवाई 18 जून को तय की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि तीनों अभ्यर्थियों ने किसी भी प्रकार की आयु सीमा में छूट का लाभ नहीं लिया है। उनका कहना है कि परीक्षा परिणाम तैयार करने में आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे उन्हें नुकसान हुआ है।
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि मेरिटोरियस रिजर्व्ड कैटेगरी के अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी में शामिल नहीं किया गया, बल्कि उन्हें केवल उनकी संबंधित श्रेणी में ही रखा गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया आरक्षण के मूल सिद्धांतों और नियमों के विपरीत है। UPPSC द्वारा सहायक अभियोजन अधिकारी 2025 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 30 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था। इसके बाद मुख्य परीक्षा 28 से 30 जून के बीच प्रस्तावित है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि प्रारंभिक परिणाम को निरस्त कर मुख्य परीक्षा को स्थगित किया जाए।
याचिका में की गई ये मांग
याचिका में 09 जनवरी 2020 के आयोग के कार्यालय ज्ञापन और प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि आरक्षण नियमों के अनुसार मेरिटोरियस रिजर्व्ड अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी में शामिल किया जाए, तो परिणाम अलग हो सकता है। याचिका में उत्तर प्रदेश आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3(6) और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला दिया गया है, जिनमें आरक्षण और मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया की व्याख्या की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वर्तमान परिणाम इन कानूनी प्रावधानों के विपरीत है। अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि अदालत का निर्णय न केवल इस भर्ती प्रक्रिया बल्कि भविष्य की चयन नीतियों पर भी असर डाल सकता है।
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