Online Shopping : ऑनलाइन शॉपिंग, टिकट बुकिंग और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है लेकिन कई बार ग्राहक जिस कीमत को देखकर खरीदारी शुरू करता है, भुगतान से ठीक पहले बिल में अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाते हैं। कहीं हैंडलिंग फीस जोड़ दी जाती है तो कहीं मेंबरशिप, डोनेशन या अन्य सेवाएं पहले से ही चयनित रहती हैं। सरकार ने अब ऐसे भ्रामक तरीकों पर सख्ती शुरू कर दी है।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने डार्क पैटर्न का इस्तेमाल करने के आरोप में नौ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुर्माना लगाया है। डार्क पैटर्न ऐसे डिजाइन या इंटरफेस होते हैं, जो ग्राहकों को अनजाने में ऐसे फैसले लेने के लिए प्रेरित करते हैं जिन्हें वे सामान्य परिस्थितियों में शायद न चुनें।
Online Shopping
सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी कि इन मामलों में नियामक ने कार्रवाई करते हुए कई कंपनियों को अपनी कार्यप्रणाली बदलने के निर्देश दिए हैं। जांच में पाया गया कि Zepto ग्राहकों को शुरुआत में एक कीमत दिखाता था, लेकिन बाद में हैंडलिंग चार्ज और मेंबरशिप फीस जोड़कर अंतिम बिल बढ़ जाता था। इसे ‘ड्रिप प्राइसिंग’ और ‘बास्केट स्नीकिंग’ की श्रेणी में माना गया। इस मामले में कंपनी पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, BookMyShow पर टिकट बुकिंग के दौरान BookASmile के लिए 1 रुपये का दान पहले से चयनित रहने पर आपत्ति जताई गई। CCPA ने इसे भी बास्केट स्नीकिंग माना और इस व्यवस्था को हटाने का निर्देश दिया।
IndiGo के मामले में नियामक ने ‘कन्फर्म शेमिंग’ पर आपत्ति जताई। एयरलाइन के ऐप में अतिरिक्त सेवा नहीं लेने वाले विकल्प को ऐसे शब्दों में दिखाया गया था, जिससे ग्राहक पर मनोवैज्ञानिक दबाव बन सकता था। बाद में कंपनी ने इसे तटस्थ भाषा से बदल दिया।
अन्य कंपनियों पर भी जुर्माना
एजुकेशन प्लेटफॉर्म Physics Wallah पर 10 रुपये का दान पहले से चयनित रखने और कुछ मामलों में मुफ्त कोर्स के बदले निजी जानकारी मांगने को लेकर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। कंपनी ने बाद में संबंधित प्रैक्टिस बंद कर दी। इसके अलावा FirstCry, PharmEasy, McAfee, SpiceJet और Anuj Jindal जैसे प्लेटफॉर्म पर भी अलग-अलग मामलों में कार्रवाई हुई। इन कंपनियों पर 1 लाख से 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया। आरोपों में छिपे हुए शुल्क, जबरन सब्सक्रिप्शन, भ्रामक काउंटडाउन टाइमर और ऑटो-रिन्यूअल जैसे तरीके शामिल थे।
क्या होते हैं डार्क पैटर्न?
भारत सरकार ने 2023 में जारी गाइडलाइंस में डार्क पैटर्न के 13 प्रकार चिन्हित किए हैं। इनमें ड्रिप प्राइसिंग, बास्केट स्नीकिंग, सब्सक्रिप्शन ट्रैप, कन्फर्म शेमिंग, झूठी अर्जेंसी और भ्रामक सवाल जैसे तरीके शामिल हैं। इनका उद्देश्य ग्राहकों को भ्रमित कर अतिरिक्त खर्च कराने या अनचाहे विकल्प चुनवाने से रोकना है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान करते समय अंतिम बिल को ध्यान से देखना चाहिए और पहले से चुने गए विकल्पों, अतिरिक्त शुल्क तथा ऑटो-रिन्यूअल जैसी सेटिंग्स की जांच जरूर करनी चाहिए। सरकार का मानना है कि डिजिटल बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए डार्क पैटर्न पर सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
Read More : FCRA Amendment Bill 2026 पर शशि थरूर का हमला, बोले- “नागरिक समाज को कमजोर करेगा नया कानून”




