UP Contract Teachers : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में 15 वर्ष से अधिक समय से संविदा पर कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के नियमितीकरण के मुद्दे पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) से पूछा है कि लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा शिक्षकों को नियमित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने 8 सितंबर तक निजी हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने संविदा शिक्षिका अर्चना बोध की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
अर्चना बोध वर्ष 2010 से अमेठी के कस्तूरबा गांधी रेजिडेंशियल गर्ल्स स्कूल में कार्यरत हैं। 16 जून को जारी विभागीय आदेश के तहत उनकी संविदा का नवीनीकरण नहीं किया गया था। शिक्षिका ने इसे अपने आजीविका के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
UP Contract Teachers
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को तत्काल राहत देते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक अर्चना बोध अपने पद पर कार्य करती रहेंगी। कोर्ट ने माना कि मामला केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से संविदा पर कार्यरत शिक्षकों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शिक्षकों की भूमिका पर महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। अदालत ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं और समाज में उनका सम्मान सर्वोच्च है। आदेश में यह भी कहा गया कि 16 वर्षों तक सेवा देने के बाद किसी शिक्षक को इस तरह असुरक्षित स्थिति में छोड़ देना गंभीर विचार का विषय है। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस मामले में राज्य सरकार की नीति और उसके प्रभाव पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
जवाब पर टिकी नजर
मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर के बाद होगी। तब तक राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि लंबे समय से संविदा पर कार्यरत शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर उसकी क्या नीति है और इस दिशा में कोई ठोस पहल की गई है या नहीं। इस मामले पर प्रदेश के हजारों संविदा शिक्षकों की नजर टिकी हुई है।
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