VDO Success Story : बस्ती में एक किसान पिता ने अपने बेटे के ग्राम विकास अधिकारी (VDO) बनने की खुशी अनोखे अंदाज में मनाई। बेटे के घर लौटने पर पिता ने उसे हाथी पर बैठाया और बैंड-बाजे व ढोल-नगाड़ों के साथ करीब एक किलोमीटर तक जुलूस निकालकर घर लेकर आए।
मामला हर्रैया थाना क्षेत्र के केशवपुर गांव का है। गांव के लोग भी बेटे के स्वागत के लिए रास्ते में खड़े रहे। हाथी पर सवार VDO को देखकर ग्रामीणों ने तालियां बजाईं और फूलों की माला पहनाकर उनका स्वागत किया। बाद में पूरे गांव में मिठाई बांटी गई।
VDO Success Story
उनके बेटे अवनीश पांडे (28) करीब 10 साल से दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। करीब एक महीने पहले उनका ग्राम विकास अधिकारी के पद पर चयन हुआ। बेटे के चयन की खबर मिलते ही पिता ने उसके भव्य स्वागत की तैयारी शुरू कर दी। शुक्रवार 21 अगस्त को अवनीश पहले ट्रेन से लखनऊ पहुंचे और वहां से कार से शाम को अपने गांव पहुंचे।
गांव के प्रवेश द्वार पर पिता महेंद्र कुमार पांडे परिवार के साथ हाथी और बैंड-बाजे लेकर उनका इंतजार कर रहे थे। बेटे के पहुंचते ही पिता ने उसकी पीठ थपथपाई और उसे हाथी पर बैठा दिया। इसके बाद बैंड-बाजे की धुन पर करीब एक किलोमीटर तक जुलूस निकाला गया।
कई बार मिली असफलता
अवनीश ने कक्षा आठ तक हर्रैया के गजाधर सिंह विद्यालय में पढ़ाई की। इसके बाद राम कुमार विक्रम सिंह इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। आगे उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली के मुखर्जी नगर चले गए।
करीब 10 वर्षों तक तैयारी के दौरान उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। आखिरकार उनका चयन VDO के पद पर हो गया।
हाथी रखने का शौक
बेटे के स्वागत में हाथी का इस्तेमाल करने के पीछे परिवार की पुरानी परंपरा भी जुड़ी है। परिवार के पास पहले हाथी पला हुआ था और घर के शुभ कार्यों में उसका इस्तेमाल किया जाता था। फिलहाल परिवार के पास हाथी नहीं है।
ऐसे में बेटे की सफलता पर पिता ने 10 हजार रुपये में हाथी किराए पर लिया और उसी पर बैठाकर बेटे को गांव में घुमाते हुए घर लेकर आए। स्वागत के बाद परिवार ने लड्डू बनवाए और पूरे गांव में बांटकर बेटे की सफलता की खुशी साझा की।
VDO बनने के बाद गांव में जश्न
अवनीश के VDO पद पर चयन की खबर गांव में पहुंचते ही परिवार और ग्रामीणों में खुशी का माहौल बन गया। 10 साल की तैयारी और कई असफलताओं के बाद मिली सफलता को परिवार ने यादगार बनाने का फैसला किया। इसी वजह से पिता ने बेटे के स्वागत के लिए हाथी और बैंड-बाजे की व्यवस्था की।
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