Vindhyachal Dham : मिर्जापुर के विंध्याचल धाम में शनिवार को भक्ति और लोक संस्कृति का खूबसूरत संगम देखने को मिला। श्री विंध्य शक्ति संघ की ओर से मां विंध्यवासिनी के आंगन में कजली महोत्सव आयोजित किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीत और नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। महोत्सव की शुरुआत मां विंध्यवासिनी के जयकारे के साथ हुई।
इसके बाद कलाकारों ने पारंपरिक कजली धुनों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। कजली गायन के जरिए विंध्य क्षेत्र की लोक परंपरा, ग्रामीण जीवन और धार्मिक आस्था की झलक देखने को मिली।
Vindhyachal Dham
कार्यक्रम में कलाकारों ने एक के बाद एक मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक कजली गायन के साथ लोकनृत्य की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं और दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। कलाकारों की प्रस्तुति पर परिसर तालियों से गूंजता रहा और श्रद्धालु भी लोकधुनों पर झूमते नजर आए। महोत्सव के दौरान विंध्याचल धाम का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालु लगातार मां विंध्यवासिनी के जयकारे लगाते रहे। भक्ति और लोक संगीत के इस मेल ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
चिह्न देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों और आयोजन में योगदान करने वाले अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि लोक कलाकार हमारी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का काम करते हैं। ऐसे कलाकारों का सम्मान करना समाज की जिम्मेदारी है। कजली महोत्सव ने विंध्याचल धाम के धार्मिक वातावरण को लोक संस्कृति के रंगों से भर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों के जरिए कजली की पारंपरिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने आयोजन की सराहना की और देर तक लोकगीतों का आनंद लिया।
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