Vastu Tips : घर में शीशे का इस्तेमाल आमतौर पर तैयार होने और चेहरा देखने के लिए किया जाता है, लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे ऊर्जा के प्रवाह से भी जोड़कर देखा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में जरूरत से ज्यादा शीशे लगाने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि घर में दो प्रमुख शीशे पर्याप्त होते हैं। इनमें एक पूर्व और दूसरा उत्तर दिशा में लगाया जा सकता है। हालांकि, ये वास्तु संबंधी मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से इनके प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई है।
वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से संबंधित माना जाता है, जबकि पूर्व दिशा को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इन दोनों दिशाओं में शीशा लगाने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि सही दिशा में लगाया गया शीशा घर के वातावरण में सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
Vastu Tips
यदि एक ही दिशा में कई शीशे लगाए गए हों और वे लगातार एक-दूसरे का प्रतिबिंब बनाते हों, तो वास्तु में इसे उचित नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति को ऊर्जा के असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है। अगर जगह की कमी या जरूरत के कारण दो शीशे लगाने पड़ें, तो उन्हें आमने-सामने या बिल्कुल सटाकर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। बेडरूम में शीशा लगाने को लेकर वास्तु में विशेष सावधानी बताई गई है। मान्यता है कि सोते समय बेड या शरीर का प्रतिबिंब शीशे में दिखाई नहीं देना चाहिए। यदि शीशा ऐसी जगह लगा है जहां से बिस्तर नजर आता हो, तो रात में उसे कपड़े से ढकने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं में इसे नींद और दांपत्य जीवन के लिए बेहतर माना जाता है।
एक शीशा ही पर्याप्त
बाथरूम में शीशे की जरूरत होती है, लेकिन वास्तु के अनुसार यहां भी एक ही शीशा रखना बेहतर माना जाता है। शीशा साफ और बिना टूट-फूट का होना चाहिए। मान्यता है कि टूटे या गंदे शीशे को घर में रखना सकारात्मक वातावरण के लिए उचित नहीं माना जाता। वास्तु के अनुसार मुख्य दरवाजे के ठीक सामने शीशा लगाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे घर में प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा का प्रतिबिंब बाहर की ओर हो सकता है। इसी कारण शीशे की स्थिति और उसका प्रतिबिंब किस दिशा में जा रहा है, इस पर भी ध्यान देने की सलाह दी जाती है।




