UP Weather Update : उत्तर प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार असर दिखा रही हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के 32 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। सुबह से कई जिलों में हल्की धूप और बादलों की आवाजाही बनी हुई है, जबकि बढ़ी हुई उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
रविवार को जालौन प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां तापमान 41 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। तेज गर्मी का असर सिर्फ लोगों पर ही नहीं बल्कि जानवरों पर भी दिखाई दे रहा है। गोरखपुर चिड़ियाघर में हाथियों को राहत देने के लिए उन्हें आइसक्रीम खिलाई गई।
UP Weather Update
लखनऊ स्थित मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह के अनुसार हरियाणा के आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण प्री-मानसून गतिविधियां बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि 17 से 20 जून के बीच मानसून सोनभद्र और ललितपुर के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। फिलहाल मानसून बिहार तक पहुंच चुका है और आगे बढ़ रहा है। 16 जून को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और नमी के कारण गर्मी से कुछ राहत मिलने की संभावना है। 17 जून को मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है, हालांकि तेज हवाओं के साथ कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। 18 जून को बादल छाए रहने और कई जगह बारिश होने के आसार हैं। वहीं 19 जून को प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से लेकर भारी बारिश और कुछ स्थानों पर तेज आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है।
अलग-अलग मौसम का असर
गाजियाबाद में सुबह से घने बादल छाए रहे और बारिश जैसे हालात बने रहे। यहां अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। दूसरी ओर गोरखपुर में तेज धूप और 61 प्रतिशत से अधिक नमी के कारण उमस काफी बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार दिन में तापमान 37 डिग्री तक पहुंच सकता है, जबकि 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है। आमतौर पर जून से सितंबर के बीच प्रदेश में 820 से 840 मिलीमीटर वर्षा होती है, लेकिन इस बार इसमें करीब 8 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई गई है। इसके चलते कुल वर्षा का आंकड़ा सामान्य स्तर से नीचे रह सकता है।
अल नीनो का असर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार प्रशांत महासागर में बदलती जलवायु परिस्थितियां मानसून को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो की ओर बढ़ते संकेत और उत्तरी गोलार्ध में कम बर्फबारी जैसी परिस्थितियां इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर बना सकती हैं, जिसका असर उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है।
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