UP Politics : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जहां विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं, वहीं बीजेपी विपक्ष के आरोपों को संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश बता रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर पत्रकार वार्ता कर कांग्रेस, सपा और राजद को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनाव जीतने पर अपनी रणनीति और नेतृत्व को श्रेय देते हैं, लेकिन हारने पर ईवीएम और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति ऐसा रवैया उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष को आत्ममंथन की सलाह देते हुए एसआईआर के विरोध और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर देशवासियों से माफी मांगने की मांग की।
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मुख्यमंत्री योगी ने विपक्षी दलों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सपा और राजद को चुनाव में सफलता मिलती है तो वे इसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं। वहीं जनता किसी चुनाव में उन्हें खारिज कर देती है तो चुनाव आयोग और ईवीएम को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों को अपने कामकाज और राजनीतिक नीतियों की समीक्षा करने की सलाह दी। एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब में योगी ने पिछली प्रक्रियाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराया जा चुका है। उनके मुताबिक इनमें से अधिकांश समय केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी। ऐसे में उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया पर विपक्ष की आपत्तियों को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी के पुराने बयानों का जिक्र
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कैंब्रिज में दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए न्यायपालिका की निष्पक्षता से जुड़े विवाद को उठाया। उन्होंने राफेल मामले में कैग की टिप्पणियों और ईवीएम को लेकर कांग्रेस के पुराने रुख पर भी निशाना साधा। योगी ने कहा कि जिन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से हुए चुनावों में कांग्रेस को सफलता मिली, उन्हीं पर बाद में सवाल उठाए गए। योगी आदित्यनाथ ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कांग्रेस के लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति रवैये की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में विपक्षी दलों की निर्वाचित सरकारों को गिराने के प्रयास भी हुए। मुख्यमंत्री ने इसे संवैधानिक संस्थाओं को लेकर मौजूदा विवाद से जोड़ते हुए कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास पर विचार करने की सलाह दी।
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर
पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया। उन्होंने विपक्ष पर सैन्य अभियानों और जवानों के पराक्रम को लेकर सवाल उठाने का आरोप लगाया। योगी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक संस्थाओं जैसे विषयों पर राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। एसआईआर की प्रक्रिया का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए आवश्यक व्यवस्था स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने फॉर्म-6 का उल्लेख करते हुए कहा कि सूची से छूटे हुए पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। योगी के मुताबिक चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बावजूद विपक्ष लगातार उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।
मतदाता सूची से नाम छूटने पर क्या बोले CM?
एसआईआर की प्रक्रिया का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए आवश्यक व्यवस्था स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने फॉर्म-6 का उल्लेख करते हुए कहा कि सूची से छूटे हुए पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। योगी के मुताबिक चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बावजूद विपक्ष लगातार उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध की जगह है, लेकिन हिंसा, तोड़फोड़ और दुष्प्रचार को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की।
सहयोगी दलों से माफी की मांग
पत्रकार वार्ता के अंत में योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से अपने बयानों और गतिविधियों पर पुनर्विचार करने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हितों के लिए चुनाव आयोग को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मांग की कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल संवैधानिक संस्थाओं तथा देशवासियों से माफी मांगें। दूसरी ओर विपक्ष की आपत्तियों का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा बना हुआ है।
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