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UP का पहला तेंदुआ सफारी पार्क, जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य; पर्यटकों को मिलेगा आधुनिक अनुभव

UP Leopard Safari Park : उत्तर प्रदेश का पहला तेंदुआ सफारी पार्क पीलीभीत जिले के गोपालपुर वनखंड में विकसित किया जा रहा है। करीब 49 करोड़ रुपये की लागत से 1716 हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य जनवरी तक पूरा करना है। यह पार्क प्रदेश के विभिन्न जिलों से रेस्क्यू किए गए तेंदुओं के सुरक्षित संरक्षण के साथ-साथ इको-टूरिज्म और पर्यावरण जागरूकता का प्रमुख केंद्र बनेगा। पीलीभीत और शाहजहांपुर की सीमा से सटे गोपालपुर वनखंड में लंबे समय से अतिक्रमण और अवैध कटान की समस्या थी।

सामाजिक वानिकी प्रभाग पीलीभीत और शाहजहांपुर वन प्रभाग के संयुक्त अभियान के बाद भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इसके बाद यहां तेंदुआ सफारी पार्क विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जिसे मंजूरी मिलने के बाद अब निर्माण कार्य शुरू होने की तैयारी है।

UP Leopard Safari Park

गोपालपुर वनखंड का प्राकृतिक परिवेश तेंदुओं के लिए उपयुक्त माना जाता है। क्षेत्र में कहमैया, कटैया, गुटेल वाला, पीरा और अधबना जैसे तालाबों के साथ प्राकृतिक नाला वर्षभर जल उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा नीलगाय, जंगली सुअर, चीतल और पाड़ा जैसे वन्यजीव पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं। कांस, कुश, खस, मूंज, पनहर और पटेर जैसी घास की प्रजातियां भी तेंदुओं के प्राकृतिक आवास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं।

पर्यटकों को मिलेगा अनुभव

सफारी पार्क में पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पीलीभीत और शाहजहांपुर की ओर से दो भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। परिसर में लैपर्ड-प्रूफ फेंसिंग, सफारी ट्रैक, रेस्क्यू इंक्लोजर, वन्यजीव चिकित्सालय, सीसीटीवी निगरानी, आधुनिक स्वागत कक्ष, 50 सीटों वाला थिएटर, प्रकृति परिचय केंद्र और सफारी वाहनों की व्यवस्था होगी। थिएटर में तेंदुओं के जीवन, संरक्षण और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी जानकारी भी दिखाई जाएगी। तेंदुआ सफारी पार्क बनने के बाद पीलीभीत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। यह पार्क लखनऊ से लगभग 260 किलोमीटर और बरेली से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। राज्य राजमार्ग-730 और 730ए से इसकी सीधी कनेक्टिविटी रहेगी। पर्यटक पीलीभीत, शाहजहांपुर और बरेली रेलवे स्टेशन के अलावा लखनऊ, बरेली, पंतनगर और दिल्ली के हवाई अड्डों के माध्यम से भी यहां आसानी से पहुंच सकेंगे।

बड़ी संख्या में होगी भर्ती

पार्क शुरू होने के बाद इसके संचालन के लिए एक रेंजर, छह वन दरोगा, 10 वन रक्षक, तीन कंप्यूटर ऑपरेटर, दो सूचना केंद्र सहायक, 15 सफाई कर्मी, पांच रात्रिकालीन सफाई कर्मी, दो स्थानीय चालक और प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक व द्वारपाल समेत अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सामाजिक वानिकी प्रभाग पीलीभीत के डीएफओ भरत कुमार डीके के अनुसार, परियोजना के लिए 12 जुलाई तक बजट जारी होने की उम्मीद है। अक्टूबर में शिलान्यास कार्यक्रम प्रस्तावित है, जबकि जनवरी तक पार्क को विकसित कर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज्म और स्थानीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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