UP Politics : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच एक पुराने मुद्दे ने फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी जहां चुनावी समीकरण मजबूत करने में जुटी हैं, वहीं एनडीए के सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने प्रदेश के बंटवारे की चर्चा दोबारा छेड़ दी है। राजभर का दावा है कि भविष्य में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा जाएगा और पूर्वांचल अलग राज्य बनने पर उसका पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होगा। उनके इस बयान के बाद छोटे राज्यों की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
अभी उत्तर प्रदेश के विभाजन की कोई आधिकारिक समयसीमा या स्वीकृत योजना सामने नहीं आई है। राजभर लंबे समय से छोटे राज्यों की वकालत करते रहे हैं। अब 2027 के चुनाव से पहले उनके इस बयान को पूर्वांचल में सुभासपा की राजनीतिक सक्रियता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है।
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ओम प्रकाश राजभर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि जब भी उत्तर प्रदेश का विभाजन होगा, पूर्वांचल का पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से बनेगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी करीब 24 वर्षों से छोटे राज्य की मांग उठा रही है। राजभर ने यह भी माना कि प्रदेश के विभाजन में पांच, दस या बीस साल लग सकते हैं। उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की चर्चा नई नहीं है। नवंबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने विधानसभा में पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश बनाने का प्रस्ताव पारित कराया था। हालांकि प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका और उत्तर प्रदेश का विभाजन नहीं हुआ।
राजभर के बयान से बंट जाएगा प्रदेश
राज्य का विभाजन किसी राजनीतिक दल या मंत्री की घोषणा से नहीं हो सकता। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्य के गठन और मौजूदा राज्यों की सीमाओं में बदलाव का अधिकार संसद को है। संबंधित राज्य विधानसभा से राय मांगी जाती है, लेकिन उसकी सहमति संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होती। फिलहाल राजभर का बयान एक राजनीतिक दावा है, अंतिम सरकारी फैसला नहीं। राज्य विभाजन के मुद्दे के साथ राजभर ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। उनकी पार्टी जौनपुर की केराकत और जफराबाद विधानसभा सीटों पर दावेदारी जता रही है। जफराबाद के मौजूदा सुभासपा विधायक जगदीश राय के राजनीतिक रुख को लेकर भी राजभर ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विधायक पार्टी के बजाय समाजवादी पार्टी के करीब दिखाई देते हैं।
सहयोगियों के बीच खींचतान
आजमगढ़ की अतरौलिया सीट को लेकर सुभासपा और निषाद पार्टी के बीच दावेदारी सामने आई है। राजभर यहां अपने बेटे अरुण राजभर को चुनाव लड़ाना चाहते हैं, जबकि संजय निषाद भी इस सीट पर अपनी पार्टी का दावा जता चुके हैं। दोनों दल एनडीए के सहयोगी हैं। ऐसे में सीट बंटवारे के दौरान इस दावेदारी पर बातचीत महत्वपूर्ण होगी राजभर ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की सराहना की। उनका दावा है कि सरकार ने संगठित अपराध और माफिया गतिविधियों पर कार्रवाई की है। उन्होंने पिछली सरकारों के कामकाज पर भी सवाल उठाए। हालांकि ये राजभर के राजनीतिक बयान हैं, कानून व्यवस्था का स्वतंत्र आकलन नहीं।
चुनावी तैयारियां साथ-साथ
राजभर के बयान से उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन की पुरानी बहस फिर सामने आ गई है। एक तरफ वह पूर्वांचल के लिए अलग राज्य और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं, दूसरी तरफ सुभासपा आगामी चुनाव में अपनी सीटों की दावेदारी मजबूत कर रही है। फिलहाल, प्रदेश के चार हिस्सों में बंटने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
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